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जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान सऊदी अरब का साथ देगा

इस्लामाबाद । इजराइल-ईरान के बीच युद्ध में अब दक्षिण एशिया भी चपेट में आ रहा है। एशियाई देशों के शिप तो हॉर्मुज में फंसे हैं, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान की टांग खाड़ी में फंसी है। सऊदी अरब के साथ डिफेंस समझौते के चलते अब पाकिस्तान भी खाड़ी की लड़ाई में कूदने की योजना बना रहा है। पीएम शहबाज शरीफ के प्रवक्ता ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान सऊदी अरब का साथ देगा। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया है और ईरान ने जवाबी हमले किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रवक्ता ने कहा पाकिस्तान सऊदी अरब की सुरक्षा और स्थिरता को बेहद अहम मानता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हमेशा अपने करीबी सहयोगी सऊदी अरब के साथ खड़ा रहेगा। एक इंटरव्यू में पाकिस्तान सरकार के प्रवक्ता मुशर्रफ जैदी ने कहा कि अगर हालात ने मांग की तो इस्लामाबाद रियाद की मदद करेगा। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि पाकिस्तान सऊदी अरब की मदद के लिए आगे आएगा। चाहे समय कोई भी हो और परिस्थिति कैसी भी हो। ऐसे में मिडिल ईस्ट का ये संघर्ष में समझौते की पहली बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।

जैदी ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते हमेशा पारस्परिक सहयोग पर आधारित रहे हैं और रक्षा समझौते से पहले भी दोनों एक-दूसरे के साथ खड़े रहते थे। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि पाकिस्तान की प्राथमिकता क्षेत्र में तनाव को और बढ़ने से रोकना है। इस बीच ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच जारी टकराव के दौरान ईरान ने खाड़ी देशों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इसी तनाव के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर सऊदी अरब पहुंचे और रक्षा मंत्री से मुलाकात की। साथ ही पाकिस्तान ईरान से भी संपर्क बनाए हुए है। विदेश मंत्री इशाक डार ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची से लगातार बातचीत की ताकि तनाव कम किया जा सके। बता दें सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच सितंबर 2025 में एक रक्षा समझौता हुआ था, इस समझौते के तहत दोनों देश सुरक्षा और सैन्य सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए हैं। इस समझौते का उद्देश्य मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में स्थिरता बनाए रखना है। साथ ही अगर किसी देश की सुरक्षा को खतरा होता है तो दूसरा देश राजनीतिक और रणनीतिक समर्थन देने के लिए तैयार रहेगा।


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