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कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में महिला आरक्षण बिल पर बैठक

नई दिल्ली । कांग्रेस मुख्यालय मे महिला आरक्षण बिल पर बैठक मे सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस हमेशा प्रतिबद्ध है। कांग्रेस ने अपने आरोपों को दोहराया है कि सरकार पांच राज्यों के चुनाव के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण के नाम पर श्रेय लेना चाहती है, जबकि महिला आरक्षण कोई मुद्दा ही नहीं है।

सांसद एवं पार्टी के संचार महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन करते हुए अनुच्छेद 334 ए तो सितंबर 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है। उन्होंने इस पश्चिम एशिया संकट से ध्यान भटकाने का प्रयास बताने के साथ ही आशंका जताई कि सरकार बिना जनगणना के जो परिसीमन करना चाहती है, उससे छोटे राज्यों को बहुत नुकसान होगा। इसे देखते हुए रणनीति बनाने के लिए विपक्ष की संयुक्त बैठक बुलाने का निर्णय कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में किया गया है। कांग्रेस मुख्यालय में शुक्रवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए। इसकी जानकारी उन्होंने एक्स पर पोस्ट में साझा करते हुए लिखा, “आज कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में महिला आरक्षण बिल पर होने वाले संसद के विशेष सत्र से पहले कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सम्मिलित हुआ। महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस हमेशा प्रतिबद्ध है।

“वहीं, बैठक का ब्योरा विस्तार से साझा करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बताया कि बैठक में पश्चिम एशिया संकट से उपजी चुनौतियों के अलावा 16 से 18 तक बुलाया जा रहा संसद का विशेष सत्र मुख्य विषय था। उन्होंने कहा कि 16 से 30 मार्च तक राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लकार्जुन खरगे ने संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू को तीन पत्र लिखते हुए मांग की थी कि पांच राज्यों के चुनाव होने के बाद यानी 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाकर प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा की जाए, फिर जब चाहे सरकार संसद सत्र बुला ले। इसके बावजूद सरकार ने विपक्ष की मांग को नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि सरकार की ओर से औपचारिक रूप से अभी तक जानकारी नहीं दी गई है कि सरकार क्या-क्या संशोधन करना चाहती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि जो जानकारी अनौपचारिक रूप से मिली है, वह अनधिकृत आंकड़ों के आधार पर परिसीमन से जुड़ी है। जयराम ने बताया कि बैठक में शामिल कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए और सभी ने चिंता जताई बिना जनगणना के परिसीमन से छोटे राज्यों को नुकसान होगा। सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि इसके विरुद्ध रणनीति बनाने के लिए अगले सप्ताह विपक्ष के प्रमुख नेताओं की बैठक बुलाई गई है।

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