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वाशिंगटन । ईरान के पास इतनी ताकतवर मिसाइलें कहां से आई? यह सवाल है इनदिनों अमेरिका और इजराइल के होश उड़ा रहा है। ईरान के हालिया हमलों ने साबित किया है कि दुनिया के सबसे आधुनिक कहे जाने वाले इजराइल अमेरिका एयर डिफेंस सिस्टम भी उसकी मिसाइलों के आगे बौने साबित हुए हैं। अब इस रहस्य से पर्दा उठ गया है और इसके तार दुनिया के सबसे रहस्मय देश और अमेरिका के दुश्मन उत्तर कोरिया से जुड़ रहे है। अमेरिकी मीडिया की एक रिपोर्ट ने सनसनी मचा दी है। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ ब्रूस वेक्टोल का दावा है कि ईरान के बैलेस्टिक मिसाइल भंडार का बड़ा हिस्सा या सीधे तौर पर उत्तर कोरिया से खरीदा गया है या उसमें उत्तर कोरियाई तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। रक्षा जानकार बेटोल जिन्होंने ईरान और उ.कोरिया की रणनीतिक साझेदारी पर किताब भी लिखी है। उन्होंने दावा किया है कि डियागो गार्सिया सैन्य ठिकाने पर ईरान ने जिस मिसाइल से हमला किया। वहां दरअसल उत्तर कोरियाई मुसुदान मिसाइल थी। ईरान ने उत्तर कोरिया से कुल 19 मुसूदान मिसाइलें खरीदी थी। इन मिसाइलों की खेप साल 2005 में ही ईरान पहुंच गई थी। यह मिसाइल लंबी दूरी तक सटीक मार करने में सक्षम है। जिससे अमेरिकी बेस भी सुरक्षित नहीं है।
रक्षा जानकार बैक्टोल की किताब के मुताबिक ईरान और उ.कोरिया के बीच ये सैन्य गठबंधन दशकों पुराना है। अमेरिका को इस पर यकीन नहीं हो रहा था कि ईरान के पास इतनी मारक क्षमता वाली मिसाइलें हो सकती हैं। लेकिन अब साफ है उ.कोरिया ने गुपचुप तरीके से ईरान को मिसाइल हब बनाया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया मिसाइलें अपनी गति और ट्रेजिकरी के कारण पकड़ी जानी मुश्किल होती हैं। इसकारण अमेरिकी और इजराइली एयर डिफेंस सिस्टम ईरान के बैलेस्टिक मिसाइलों को रोकने में पूरी तरह से कामयाब नहीं हुए। ईरान और उत्तर कोरिया के इस जुगलबंदी ने मिडिल ईस्ट के युद्ध को और खतरनाक बना दिया है। अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका इस खुलासे के बाद उत्तर कोरिया के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाएगा या फिर ईरान की मिसाइलें अमेरिका के दबदबे को ही खत्म कर देंगी? 28 फरवरी 2026 की तारीख है जब मिडिल ईस्ट की धरती एक बार फिर लहूलुहान हो गई। अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सेनाएं ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के नाम पर ईरान पर बारूद बरसा रही हैं। लेकिन इस जंग के पीछे जो दावे किए गए अब उनकी कलई खुलने लगी है। क्या दुनिया को एक और इराक युद्ध जैसी त्रासदी की ओर धकेला जा रहा है? ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक हमलों में 2000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। वहीं एक अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन का दावा रोंगटे खड़े कर देने वाला है। 3500 से ज्यादा मौतें, जिसमें 250 से ज्यादा मासूम बच्चे शामिल हैं। पूरी दुनिया में ट्रंप और नेतन्याहू की थूथू हो रही है और अब उनके मित्र देश भी उनके खूनखराबे के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए के पूर्व प्रमुख मोहम्मद अल बबरदाई ने पूरी दुनिया को आगाह किया है। उन्होंने ट्रंप के कदमों पर कड़ी नाराजगी जताकर कहा कि अगर इन पागलपन भरे फैसलों को नहीं रोका गया, तब पूरा मिडिल ईस्ट आग का गोला बन जाएगा। हाल ही में ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया में के सैन्य अड्डे पर दो मिसाइल दागी थीं।
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