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कई यूट्यूब चैनल्स कमाई के लिए गलत सलाह या कॉपी-पेस्ट वाला कंटेंट फैला रहे

नई दिल्ली। देश में करीब 2.5 करोड़ यूट्यूब चैनल्स में से महज 30 लाख ही प्रोफेशनल हैं, बाकी करोड़ों चैनलों में से कई बिना नियमन या कमाई के गलत सलाह या कॉपी-पेस्ट वाला कंटेंट फैला रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में यूट्यूब के हर महीने करीब 50 करोड़ सक्रिय यूजर्स हैं। अब यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक डॉक्टर, मैकेनिक, जिम ट्रेनर और कानूनी सलाहकार तक बन चुका है।

यदि इन चैनलों पर बताई गई किसी सलाह से किसी को नुकसान हो जाए तो न्याय पाने का रास्ता इतना पेंचीदा है कि अपराधी साफ बच निकलता है। देश में हर 10 में से 7 लोग यूट्यूब की सलाह पर भरोसा करते हैं, जिनमें से 60फीसदी उसे बिना क्रॉस-चेक किए सही मान लेते हैं। डिजिटल कानूनों से समृद्ध भारत बुक के लेखक और वकील ने बताया कि यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करना चाहिए, तभी इन पर लगाम लग सकती है। यूट्यूब/फेसबुक जैसी कंपनियों का तर्क है ‘हम सिर्फ प्लेटफॉर्म दे रहे हैं, कंटेंट तो लोग डाल रहे हैं।’ इंटरमीडिएरी की वजह से उन्हें ‘सेफ हार्बर’ की सुरक्षा मिलती है यानी यूजर के गलत वीडियो के लिए यूट्यूब को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। लेखक कहते हैं कि यह गलत है क्योंकि यूट्यूब बिना किसी रजिस्ट्रेशन के चल रहा है। उसे बिचौलिया नहीं, बल्कि मीडिया कंपनी मानना चाहिए। कंपनी कानून व आयकर कानून के मुताबिक देश में इनकी व्यापारिक उपस्थिति के आधार पर इन पर टैक्स लगाने के साघ्थ ही देश का कानून लागू होना चाहिए। ये कंपनियां भारतीयों के डेटा का इस्तेमाल करके विज्ञापन से मोटा पैसा कमाती हैं। इस डेटा के कारोबार पर जीएसटी लगना चाहिए। टैक्स सिर्फ विज्ञापन आय पर नहीं, ग्लोबल यूजर्स की संख्या के अनुपात में लगाया जाना चाहिए। आईटी नियमों के मुताबिक इन कंपनियों की घ्शिकायत व नामांकित अधिकारियों की डिटेल सार्वजनिक होना चाहिए ताकि पुलिस और कोर्ट को साइबर क्राइम के समाधान में इनसे मदद मिल सके।


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