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मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है

नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। महर्षि कात्यायन की पुत्री होने के कारण इन्हें कात्यायनी कहा जाता है। इन्हें शक्ति, साहस और धर्म की रक्षक माना जाता है। इस दिन भक्त शत्रुओं पर विजय, सुख-समृद्धि और विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए इनकी पूजा करते हैं।  मां कात्यायनी शक्ति और साहस की प्रतीक हैं। कहा जाता है कि इनकी पूजा करने से भक्तों को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। देवी कात्यायनी को ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में भी पूजा जाता है। आज चैत्र नवरात्र का छठा दिन है, तो आइए इस दिन से जुड़ी सभी बातों को जानते हैं। 

पूजन मंत्र 

1. चतुर्भुजा सिंहस्था खड्गशूलवराभयकरा। कात्यायनी महामाया चंद्रार्धकृतशेखरा 

मां कात्यायनी की पूजा और महत्वः

पूजा मंत्रः देवी कात्यायन्यै नमः।

स्वरूपः माता कात्यायनी सिंह पर सवार हैं और उनकी चार भुजाएं हैं।

भोगः माता को शहद का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे जीवन में मधुरता आती है।

रंगः इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना और पीले फूल अर्पित करना विशेष फलदायी है।

पूजा विधि 

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।

पीले रंग के वस्त्र धारण करें।

मां कात्यायनी की पूजा का संकल्प लें।

मां कात्यायनी की प्रतिमा स्थापित कर, उनका ध्यान करें।

मां कात्यायनी का आह्वान करें।

उन्हें कुमकुम, अक्षत, हल्दी और चंदन आदि चीजें अर्पित करें।

धूप और दीप जलाएं।

देवी के मंत्रों का जाप करें।

दुर्गा सप्तशती के छठे अध्याय का पाठ करें।

मां कात्यायनी की आरती करें।

अंत में मां से पूजा में हुई गलती के लिए माफी मांगे और अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

विशेष उपायः विवाह में देरी या बाधा होने पर, इस दिन माता को छह गांठ हल्दी अर्पित करें।

कथाः पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महिषासुर नामक राक्षस का वध करने के लिए मां दुर्गा ने कात्यायनी रूप धारण किया था। 

इनकी पूजा करने से भक्तों के जीवन में संतुलन, धैर्य और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है

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