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मिडलाइफ महिलाएं समझने लगती हैं अपनी वास्तविक कीमत : लिसा रे

मुंबई । सोशल मीडिया के जरिए कनाडाई-भारतीय अभिनेत्री  लिसा रे महिलाओं के स्वास्थ्य, उम्र बढ़ने और जीवन से जुड़े कई अहम विषयों पर खुलकर अपने विचार साझा करती रहती हैं।

उन्होंने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मिडलाइफ को लेकर एक भावनात्मक और प्रेरणादायक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने इस दौर को महिलाओं के जीवन का महत्वपूर्ण और सशक्त चरण बताया। लिसा रे ने अपने पोस्ट में लिखा कि जब शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, तब महिलाओं के जीवन में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। उनके अनुसार इस समय लोग दूसरों को खुश करने की पुरानी आदतों से बाहर निकलने लगते हैं और खुद पर संदेह करना भी धीरे-धीरे कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस उम्र में मानसिक शांति सबसे अधिक महत्वपूर्ण लगने लगती है और व्यक्ति अपने लिए तय की गई सीमाओं और नियमों को ज्यादा मजबूती से स्वीकार करता है। अभिनेत्री ने आगे कहा कि मिडलाइफ केवल शारीरिक बदलावों का दौर नहीं है, बल्कि यह वह समय भी होता है जब जीवन से कई अनावश्यक चीजें अपने-आप दूर होने लगती हैं। इस दौरान व्यक्ति कम माफी मांगता है और खुद को बार-बार साबित करने की जरूरत भी महसूस नहीं करता। उन्होंने लिखा कि इस उम्र में महिलाएं अपनी वास्तविक कीमत समझने लगती हैं और जरूरत पड़ने पर स्पष्ट रूप से ‘ना’ कहना भी सीख जाती हैं। इससे जीवन अधिक संतुलित और सुकूनभरा हो जाता है। 

अपनी बात को समाप्त करते हुए लिसा रे ने कहा कि मिडलाइफ को किसी संकट या परेशानी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक यह वह खास समय है जब एक महिला अपनी असली ताकत के साथ जीना शुरू करती है। यह जीवन की कहानी का दूसरा अध्याय होता है, जो पूरी तरह उसका अपना होता है और जिसमें वह पहले से कहीं ज्यादा आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ आगे बढ़ती है। बताया जाता है कि  लिसा रे 1990 के दशक की जानी-मानी अभिनेत्री और मॉडल रही हैं। उन्होंने 1994 में फिल्म हंसते खेलते से हिंदी सिनेमा में कदम रखा था, लेकिन उन्हें असली पहचान फिल्म कसूर से मिली। इसके बाद वह वाटर और आई केन नॉट थिंक स्ट्राइट जैसी फिल्मों में भी नजर आईं। 

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