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ममता कुलकर्णी ने सिनेमा से बनायी थी दूरी

अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने खुलासा किया है कि उनकी मां की वजह से उन्होंने हिंदी सिनेमा से दूरी बनाने का फैसला किया था। 20 अप्रैल को एक मराठी परिवार में जन्मी ममता कुलकर्णी को शुरुआत में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का अच्छा ज्ञान नहीं था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने 90 के दशक की कई सुपरहिट फिल्मों में अपनी अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवाया। हिंदी सिनेमा में कदम रखने से पहले, अभिनेत्री ने तमिल सिनेमा में अपने करियर को चमकाने की कोशिश की और उन्हें पहली फिल्म 1991 में ननबरगल मिली। इसके बाद साल 1992 में उन्होंने तेलुगु रोमांस ड्रामा प्रेमा शिखराम में काम किया। उसी साल ममता की किस्मत चमकी और उन्होंने पहली हिंदी फिल्म तिरंगा से बॉलीवुड में शानदार एंट्री की। मल्टीस्टारर फिल्म होने के बावजूद, ममता के खूबसूरत चेहरे और कर्ली बालों ने दर्शकों का दिल जीत लिया और उन्हें खूब पसंद किया गया। ममता ने खुद कई बार इस बात का जिक्र किया कि सिनेमा में उन्हें काम के लिए किसी तरह की परेशानी या संघर्ष नहीं करना पड़ा, बल्कि उन्हें जो फिल्में ऑफर होती थीं, वे कोशिश करती थीं कि किसी को मना न करें और हर अच्छे मौके को भुनाएं। साल 1993 में आई फिल्म आशिक आवारा ने ममता को रातोंरात स्टार बना दिया।

 इस फिल्म में उनके अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर न्यू फेस अवॉर्ड से भी नवाजा गया और इसके बाद उनकी सुपरहिट फिल्मों का सिलसिला चलता रहा। हालांकि, साल 2000 के आते-आते उन्होंने अध्यात्म को अपनी नई मंजिल चुना और धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया से किनारा करना शुरू कर दिया। एक समय ऐसा भी आया, जब दुबई के रहने वाले अंडरवर्ल्ड ड्रग माफिया विक्की गोस्वामी के साथ उनके रिश्तों की वजह से बी-टाउन में अभिनेत्री के लिए काम करना मुश्किल हो गया। कई निर्देशक उनके साथ फिल्म करने से कतराने लगे, और फिर साल 2002 आते-आते उन्होंने पूरी तरह से बॉलीवुड को अलविदा कह दिया। उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने से पहले उन्हें 30-40 फिल्में ऑफर हुई थीं, लेकिन उनका मन समझ चुका था कि यह सब केवल एक भ्रम है। उन्होंने कहा, मैंने नौ दिन मां की आराधना की। उसी दौरान मेरी मां का भी निधन हो गया। उनके जाने के बाद मेरे अंदर कोई इच्छा नहीं बची थी और मुझे हिंदी सिनेमा में काम नहीं करना था।  


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