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मुर्मु ने 562 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई

गांधीनगर । राष्ट्रीय सुरक्षा एवं पुलिस प्रशिक्षण क्षेत्र की देश की अग्रणी संस्था, राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी (आरआरयू) में मंगलवार को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामय अध्यक्षता में पांचवां दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल विशेष रूप से उपस्थित रहे। राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के पांचवें दीक्षांत समारोह में दीक्षांत भाषण देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि दीक्षांत समारोह किसी भी शैक्षणिक संस्था के लिए गौरव का क्षण होता है, क्योंकि वह राष्ट्रहित के लिए शिक्षित, प्रशिक्षित और समर्पित युवा पीढ़ी समाज को समर्पित करती है। उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यही युवा शक्ति देश के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य का आधार है। इस अवसर पर उन्होंने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान कर विशेष गौरव की भावना व्यक्त की।

राष्ट्रपति ने बदलते समय की सुरक्षा चुनौतियों के बारे में बात करते हुए जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल युग के आगमन के साथ साइबर क्राइम, फिशिंग अटैक और डेटा सुरक्षा जैसे नए खतरे देश के सामने बड़े संकट के रूप में उभरे हैं। पहले ये शब्द केवल परिचय तक सीमित थे, लेकिन आज ये वास्तविक चुनौती हैं। ऐसी परिस्थिति में राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं का महत्व तथा जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है, क्योंकि देश की सुरक्षा का सुचारु संचालन अब आधुनिक तकनीकी कौशल पर निर्भर है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश को आज ऐसे कुशल पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता है जो साइबर अपराधियों को पकड़ने और उन्हें सजा दिलाने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम और सशक्त हों। इसके साथ ही न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए ऐसे फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भी आवश्यकता है जो न्यायालय की कसौटी पर खरे उतरने वाले प्रमाण प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने जोड़ा कि अब सुरक्षा केवल भौगोलिक सीमाओं या पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और कूटनीति पारंपरिक  शक्ति जितनी ही महत्वपूर्ण बन गई हैं।

राष्ट्र की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के बारे में बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सुरक्षा के लिए आवश्यक शस्त्रों और साधनों के उत्पादन में भारत आत्मनिर्भर बने, इस दिशा में सरकार ठोस प्रयास कर रही है। राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी द्वारा ‘डीप टेक’ संबंधित नीतियों में उद्योगों के साथ किया गया जुड़ाव प्रशंसनीय है। उन्होंने सुझाव दिया कि रक्षा क्षेत्र में बदलते रुझानों को ध्यान में रखते हुए यूनिवर्सिटी को अपनी रणनीति लगातार अपडेट करनी चाहिए, ताकि देश के आर्थिक विकास और समृद्धि के लिए सुरक्षित परिवेश मिल सके।

सूचना प्रौद्योगिकी तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ‘इंडिया एआई मिशन’ और एआई गवर्नेंस के माध्यम से भारत विश्व पटल पर महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर रहा है। 2026 तक भारत इस क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनकर उभरेगा, जो देश की सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए गेम-चेंजर सिद्ध होगा। साइबर सुरक्षा अब केवल सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह डिजिटल विश्वास का भी अभिन्न अंग है।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने सुरक्षा बलों के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि हाल ही में नक्सलवाद के विरुद्ध सुरक्षा बलों ने निर्णायक विजय प्राप्त किया है। देश के जिन क्षेत्रों में पहले भय का वातावरण था, वहां आज शांति और सुरक्षा स्थापित हुई है। पहले जहां नक्सलवाद का लाल झंडा लहराता था, वहां आज देश का राष्ट्रध्वज लहरा रहा है। इस सफलता के लिए उन्होंने सभी राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की विशेष प्रशंसा की। राष्ट्रपति ने जोड़ा कि सुरक्षित वातावरण में ही व्यापार और आर्थिक समृद्धि फलती-फूलती है, इसलिए सुरक्षा कर्मियों का योगदान देश के विकास से सीधे जुड़ा है।

शैक्षणिक और खेल क्षेत्र में यूनिवर्सिटी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी खेलकूद और शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट कार्य कर रही है। यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और कुश्ती जैसे खेलों में पदक जीतकर संस्था का नाम रोशन किया है। उन्होंने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए खेल क्षेत्र में और प्रगति करने के लिए प्रोत्साहित किया।

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