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नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी रूप की अराधना होती है

नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी रूप की अराधना होती है, इस दिन मेरे कंद, फूल, चंद्र अथवा श्वेत शंख जैसे निर्मल गौर वर्ण वाले आठवें विग्रह स्वरूप का भक्त दर्शन-पूजन करते हैं। इनका वाहन भी हिम के समान सफेद या गौर रंग वाला वृषभ अर्थात् बैल है। भक्तों के हृदय में स्थित मां दुर्गा स्वयं कहती हैं, ‘आठवें दिन महागौरी के रूप में मैं सुख- सम्पति प्रदान करती हूं तथा भक्तों के लिए सफलता की राह आसान बनाती हूं।’

नवरात्रि की महाअष्टमी के दिन अगर भक्त के हृदय में सच्ची साधना की अभिलाषा विद्यमान हो, तो भगवती उसे जीवन के समस्त सुख- सुविधा प्रदान करती है, शरीर में उत्पन्न नाना प्रकार के रोग, शोक, व्याधि आदि का अंत कर जीवन को आरोग्यता से पूर्ण करती हैं। मैं मनुष्य की प्रवृत्ति सत् की ओर प्रेरित करके असत् का विनाश करती हूं। मेरा यह शक्ति विग्रह भक्तों को तुरंत और अमोघ फल प्रदान करता है। मेरी सच्ची उपासना से भक्त के जन्म-जन्मांतर के सभी पाप और कलंक धुल जाते हैं और मार्ग से भटका हुआ भी सन्मार्ग पर आ जाता है, भविष्य में पाप-संताप, निर्धनता, दीनता और दुख उसके पास नहीं फटकते। मेरी कृपा से साधक सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है, उसे अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। अपने पार्वती रूप में जब मैंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए बड़ी कठोर तपस्या की, तब मेरे इस कठोर तप के कारण मेरी देह क्षीण और वर्ण काला पड़ गया, अंत में मेरी तपस्या से संतुष्ट होकर जब भगवान शिव ने अपनी जटा से निकलती पवित्र गंगाधारा का जल मुझपे डाला, तो मैं विद्युत प्रभा के समान अति कांतिमान और गौर वर्ण की हो गई, तभी से मेरा नाम महागौरी पड़ा।

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