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फिलीपींस के बाद अब इंडोनेशिया खरीदेगा भारत का ब्रह्मोस

नई दिल्ली । भारत की सैन्य तकनीक और रक्षा निर्यात के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश इंडोनेशिया ने भारत के साथ दुनिया की सबसे मारक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की खरीद के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इंडोनेशियाई रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह सौदा जकार्ता की सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण और विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा को अभेद्य बनाने की रणनीति का एक हिस्सा है। हालांकि इस समझौते की आधिकारिक कुल कीमत का खुलासा अभी नहीं किया गया है, लेकिन रणनीतिक हलकों में इसकी चर्चा लंबे समय से 200 से 350 मिलियन डॉलर के बीच चल रही थी।

यह ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली के लिए दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर है। इससे पहले साल 2022 में फिलीपींस ने 375 मिलियन डॉलर के सौदे के साथ इस भारतीय-रूसी संयुक्त उद्यम पर भरोसा जताया था। 9 मार्च 2026 तक इंडोनेशिया के साथ हुए इस नए समझौते ने दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रक्षा साख को और मजबूत कर दिया है। ब्रह्मोस मिसाइल को भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के एनपीओ माशिनोस्ट्रोयेनिया ने मिलकर तैयार किया है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मॉस्कवा नदी के मेल से बना है, जो दोनों देशों के अटूट रक्षा सहयोग का प्रतीक है।

तकनीकी रूप से ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे तेज और अचूक मिसाइल माना जाता है। यह ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज यानी मैक 2.8 से 3.0 की रफ्तार से उड़ती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी फायर एंड फॉरगेट (दागो और भूल जाओ) तकनीक है। यह मिसाइल रडार की नजरों से बचने के लिए समुद्र की सतह से मात्र 3 से 10 मीटर की ऊंचाई पर उड़ने में सक्षम है, जिससे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना लगभग असंभव हो जाता है। इसे जमीन, युद्धपोत, पनडुब्बी और सुखोई-30 एमकेआई जैसे लड़ाकू विमानों से भी दागा जा सकता है। ब्रह्मोस की वैश्विक मांग के पीछे इसकी युद्ध-सिद्ध क्षमता का भी बड़ा हाथ है। साल 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के रणनीतिक ठिकानों और सैन्य अड्डों पर इस मिसाइल के सटीक हमलों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था।

उस दौरान इसके विनाशकारी प्रभाव और सटीकता को देखते हुए कई देशों ने इसे अपनी सेना में शामिल करने की इच्छा जताई थी। भारत अब रक्षा उपकरणों के शुद्ध आयातक से बदलकर एक प्रमुख निर्यातक बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इंडोनेशिया के साथ हुआ यह ताजा समझौता न केवल भारत के रक्षा राजस्व को बढ़ाएगा, बल्कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को भी विस्तार देगा।

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