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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से अपनी दूसरी और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इजरायल यात्रा शुरू कर रहे हैं। वर्ष 2017 में अपनी ऐतिहासिक पहली यात्रा के बाद, यह दौरा एक ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) के हालात बेहद जटिल हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल के सामने कई चुनौतियां हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तर पर ले जाना है, बल्कि रक्षा, प्रौद्योगिकी और कृषि जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को और अधिक ठोस बनाना है। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को बरकरार रखना होगा, ताकि उसकी छवि किसी एक पक्ष की ओर झुकी हुई नजर न आए। भारत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि वह एक संप्रभु और स्वतंत्र फिलिस्तीन के समर्थन की अपनी पुरानी नीति पर अडिग है, और संभावना है कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में पुनः इस प्रतिबद्धता को दोहरा सकते हैं।
इस यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र में सह-उत्पादन का मुद्दा शीर्ष प्राथमिकता पर रहने वाला है। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच बैलिस्टिक मिसाइलों और उन्नत ड्रोन तकनीक के साझा उत्पादन पर अंतिम मुहर लग सकती है। पिछले वर्ष हुए रक्षा सहयोग समझौते के बाद यह कदम मेक इन इंडिया अभियान को वैश्विक रक्षा बाजार में और मजबूती प्रदान करेगा। दोनों देश लंबे समय से आतंकवाद के शिकार रहे हैं, इसलिए आतंक के सभी स्वरूपों और उनके समर्थकों के खिलाफ एक समान दृष्टिकोण रखना इस साझेदारी का एक मजबूत आधार रहा है। प्रधानमंत्री इजरायल की संसद नेसेट को भी संबोधित करेंगे, जहाँ वे दोनों देशों के साझा मूल्यों और भविष्य की रणनीतिक भागीदारी का खाका पेश कर सकते हैं।
राजनीतिक स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच गहरा व्यक्तिगत संवाद रहा है। 2017 की पहली यात्रा के बाद से ही दोनों नेताओं के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है, जिससे रणनीतिक संबंधों को एक नई गति मिली है। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जाेग से भी मुलाकात करेंगे। इस उच्च स्तरीय वार्ता में विज्ञान, नवाचार, जल प्रबंधन और कृषि जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। विशेष रूप से भारत में कृषि की उत्पादकता बढ़ाने के लिए इजरायली तकनीक का उपयोग एक सफल मॉडल रहा है, जिसे अब अगले चरण में ले जाने की योजना है। आर्थिक और मानवीय संबंधों की बात करें तो इजरायल में वर्तमान में लगभग 41 हजार भारतीय रह रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच एक सांस्कृतिक पुल का कार्य करते हैं। इनमें से लगभग 20 हजार भारतीय पिछले एक वर्ष में हुए रोजगार समझौते के तहत इजरायल गए हैं। इस यात्रा में दोनों देशों के बीच आवागमन को और अधिक सुगम बनाने तथा रोजगार के नए अवसरों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। यह दौरा न केवल दो देशों के बीच के व्यापारिक आंकड़ों को बढ़ाने के लिए है, बल्कि वैश्विक राजनीति में भारत की एक कुशल मध्यस्थ और संतुलित शक्ति के रूप में पहचान को और प्रगाढ़ करने का भी अवसर है। भारत की नजर इस बात पर होगी कि कैसे रक्षा तकनीकों का हस्तांतरण सुनिश्चित करते हुए क्षेत्रीय शांति में अपना योगदान दिया जाए।
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