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राज्यसभा चुनाव: बाबुल सुप्रियो को मौका

 कोलकाता। आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पश्चिम बंगाल से उच्च सदन के लिए अपने चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने इस बार अपने चयन में राजनीतिक अनुभव, प्रशासनिक कुशलता, कानूनी विशेषज्ञता और सांस्कृतिक लोकप्रियता का एक अनूठा संतुलन बनाने का प्रयास किया है। 

पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस सूची को साझा करते हुए विश्वास जताया कि ये उम्मीदवार पार्टी की विरासत को आगे बढ़ाएंगे और हर भारतीय के अधिकारों व सम्मान की रक्षा के लिए संसद में आवाज उठाएंगे।पार्टी द्वारा घोषित नामों में सबसे प्रमुख नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो का है, जो पहले भाजपा में थे और नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रह चुके हैं। 

सितंबर 2021 में भाजपा छोड़कर टीएमसी में शामिल होने के बाद पार्टी ने अब उन्हें राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है। इनके साथ ही पश्चिम बंगाल पुलिस के पूर्व महानिदेशक राजीव कुमार को भी उम्मीदवार बनाया गया है। प्रशासनिक गलियारों में अपनी धाक रखने वाले राजीव कुमार के अनुभव से पार्टी को मजबूती मिलने की उम्मीद है। कानूनी मोर्चे पर अपनी बात मजबूती से रखने के लिए टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी पर भरोसा जताया है, जो देश के कई महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। वहीं, ग्लैमर और बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को जोड़ते हुए टॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री कोएल मलिक को भी राज्यसभा का टिकट दिया गया है। कोएल मलिक की जमीनी लोकप्रियता पार्टी के लिए नई ऊर्जा का संचार कर सकती है।

हालांकि, इस घोषणा के साथ ही पार्टी के भीतर बड़े बदलाव भी देखने को मिले हैं। टीएमसी ने अपने उन चार सांसदों को दोबारा नामांकित नहीं किया है जो सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इनमें महासचिव सुब्रत बख्शी, रितब्रत बनर्जी और साकेत गोखले शामिल हैं, जबकि मौसम नूर पहले ही कांग्रेस का दामन थाम चुकी हैं। इस बीच, विपक्षी दल भाजपा ने इन उम्मीदवारों के चयन पर तीखा हमला बोला है। भाजपा की बंगाल इकाई ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की बंगाल पहले वाली नीति महज एक दिखावा है, क्योंकि घोषित उम्मीदवारों में से आधे गैर-बंगाली हैं। भाजपा का दावा है कि टीएमसी केवल चुनावी लाभ के लिए बंगाली अस्मिता का इस्तेमाल करती है और असल में बंगालियों को नजरअंदाज कर रही है। चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार, पश्चिम बंगाल सहित 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है। यह चुनाव परिणाम राज्य की भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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