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शरद पवार, सिंघवी सहित कौन से 26 नेता पहुंचे राज्यसभा

नई दिल्ली । राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले सहित 26 उम्मीदवार सोमवार को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए। नाम वापसी की आखिरी तारीख बीत जाने के बाद, अब उच्च सदन की 11 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा। बिहार में पांच, ओडिशा में चार और हरियाणा में दो सीटे हैं जहां चुनाव होना है। इन द्विवार्षिक चुनावों में बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए चुनने की पूरी संभावना है। 10 राज्यों में खाली हुई 37 सीटों के लिए कुल 40 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया था। नाम वापसी के बाद, अब बिहार, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। 11 सीटों के लिए अब कुल 14 उम्मीदवार चुनावी मैदान में बचे हैं।

भाजपा ने नियुक्त किए केंद्रीय पर्यवेक्षक

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को बिहार, हरियाणा और ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की एक अधिसूचना जारी की। इसमें बिहार से केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, हरियाणा से गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी और ओडिशा के लिए महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले का नाम शामिल है। 

बिहार (5 सीटें)

बिहार में एक सीट के लिए दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा क्योंकि राजद (राजद) ने कारोबारी से राजनेता बने अपने मौजूदा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया है। वहीं एनडीए की ओर से केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (हैट्रिक की कोशिश में), रालोमो (आरएलएम) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (लगातार दूसरे कार्यकाल की उम्मीद में) और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार अपना संसदीय पदार्पण कर रहे हैं।

जहां राजद के पास 25 विधायक हैं और कांग्रेस-वाम दलों सहित महागठबंधन के 10 अन्य विधायकों का समर्थन है। पार्टी एआईएमआईएम और बसपा की मदद से छह वोटों की अपनी कमी को पूरा करने की उम्मीद कर रही है। बिहार विधानसभा सचिव ख्याति सिंह के अनुसार, छह उम्मीदवारों में से किसी ने भी अपना नामांकन वापस नहीं लिया, जिसके कारण राज्य में एक दशक से अधिक समय में पहली बार मतदान की आवश्यकता पड़ रही है।ओडिशा से भाजपा उम्मीदवार प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार। वहीं बीजद ने संतरूप मिश्रा और प्रख्यात यूरोलॉजिस्ट डॉ. दातेश्वर को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा के समर्थन से दिलीप रे ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है, जिससे यहां क्रॉस-वोटिंग की संभावना बढ़ गई है।

हरियाणा में भी एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होना है, जहां पहले भी क्रॉस-वोटिंग का इतिहास रहा है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और एक सीट जीतने के लिए विपक्षी पार्टी को केवल 31 पहली पसंद वाले वोटों की आवश्यकता है। उम्मीदवार में भाजपा से संजय भाटिया, कांग्रेस से करमवीर सिंह बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल। नांदल ने 2019 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था और अब वह मैदान में तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतरे हैं।

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