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तमिलनाडु में भूजल स्तर में गिरावट

चेन्नई। तमिलनाडु में भूजल स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई है। सरकारी जल संसाधन विभाग के अंतर्गत राज्य भूजल और सतही जल संसाधन डेटा सेंटर द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 38 में से 29 जिलों में फरवरी में पिछले साल की इस अवधि की तुलना में भूजल स्तर में गिरावट आई है। आंकड़ों से पता चलता है कि दिंडीगुल और तिरुपुर जिलों में भूजल स्तर में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जहां दोनों जिलों में भूजल स्तर 2.58 मीटर तक गिर गया है। 

इसके बाद कोयंबटूर में 2.07 मीटर की गिरावट आई, जबकि सलेम 1.68 मीटर, धर्मपुरी 1.62 मीटर, करूर 1.54 मीटर और पेराम्बालुर 1.20 मीटर में भी भूजल स्तर में उल्लेखनीय कमी देखी गई। इन तीव्र गिरावटों से राज्य के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में भूजल भंडारों पर बढ़ते दबाव का संकेत मिलता है। कई अन्य जिलों में भी मामूली गिरावट देखी गई। मदुरै में 1.27 मीटर की गिरावट दर्ज की गई, जबकि विरुधुनगर और पेरंबालूर में 1.20 मीटर की गिरावट आई। नमक्कल 1.08 मीटर और इरोड 1.10 मीटर में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। उत्तरी तमिलनाडु में तिरुवल्लूर में 0.99 मीटर और तिरुवनमलाई में 0.85 मीटर की गिरावट दर्ज की गई, जो कई क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर भूस्खलन को दर्शाती है।

इसके विपरीत तटीय और डेल्टा जिलों में अपेक्षाकृत मामूली बदलाव दर्ज किए गए। नागपट्टिनम में सबसे कम गिरावट मात्र 0.03 मीटर दर्ज की गई, इसके बाद नीलगिरि 0.04 मीटर और तिरुवरूर 0.11 मीटर का स्थान रहा, जो इन क्षेत्रों में अपेक्षाकृत स्थिर भूजल स्थिति का संकेत देता है। जल स्तर में कमी की मात्रा विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि तमिलनाडु में 2025 में 12 फीसदी ज्यादा वर्षा हुई थी। भारत मौसम विभाग के चेन्नई केंद्र के मुताबिक राज्य में सामान्य 920.9 मिमी के मुकाबले 1,027.7 मिमी बारिश दर्ज की गई। चेंगलपट्टू एकमात्र ऐसा जिला था जहां सामान्य से कम बारिश हुई, जबकि दस जिलों में सामान्य से 20 से 59 फीसदी ज्यादा बारिश हुई और एक जिले में 60 फीसदी से भी ज्यादा बारिश दर्ज की गई। गर्मी का मौसम शुरु हो चुका है साथ ही यह प्रवृत्ति जल स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है। खासकर राज्य के सूखाग्रस्त और उच्च मांग वाले क्षेत्रों में। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल सुधारात्मक उपाय लागू नहीं किए गए, जिनमें वर्षा जल संचयन में सुधार और भूजल का विनियमित उपयोग शामिल हैं, तो तमिलनाडु को आने वाले महीनों में तीव्र जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।


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