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तमिलनाडु में बंपर वोटिंग

नई दिल्ली। तमिलनाडु के चुनावी इतिहास में गुरुवार का दिन एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। प्रदेश की 234 विधानसभा सीटों के लिए हुए मतदान में जनता ने जबरदस्त उत्साह दिखाते हुए पिछले 74 साल के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 85.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, जो आजादी के बाद से अब तक का सर्वाधिक स्तर है। प्रदेश भर के पोलिंग बूथों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखी गईं, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है।

इस बार मतदाताओं की संख्या में तकनीकी सुधार (एसआईआर) के कारण कमी आई थी, जिससे कुल मतदाता 6.41 करोड़ से घटकर 5.73 करोड़ रह गए। हालांकि, इसके बावजूद वोट डालने वालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लगभग 4.87 करोड़ लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो पिछले चुनाव की तुलना में करीब 23 लाख अधिक है। जिलों की बात करें तो करूर में सबसे ज्यादा 91.86 प्रतिशत वोटिंग हुई, जबकि कन्याकुमारी में सबसे कम 75.50 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस बंपर वोटिंग ने सत्तारूढ़ द्रमुक (डीएमके) और मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम के चुनावी मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। जानकारों का मानना है कि युवाओं और अल्पसंख्यक मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग विजय की ओर आकर्षित हुआ है, जिससे पारंपरिक दलों के वोट बैंक में सेंध लग सकती है। सत्ताधारी द्रमुक जहां सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकंबेंसी) का सामना कर रही है, वहीं अन्नाद्रमुक आंतरिक कलह से जूझ रही है। चुनाव परिणामों को लेकर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भरोसा जताया है कि तमिलनाडु की जीत होगी, जबकि ईके पलानीस्वामी ने अन्नाद्रमुक की सत्ता में वापसी का दावा किया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस ऐतिहासिक भागीदारी के लिए मतदाताओं को सलाम किया है। इससे पहले 2011 में सर्वाधिक 78.29 प्रतिशत मतदान हुआ था, तब सत्ता परिवर्तन हुआ था। अब देखना यह होगा कि 2026 के इस ऐतिहासिक जनादेश से तमिलनाडु की राजनीति में क्या बड़ा बदलाव आता है।

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