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ट्रंप का सिरदर्द बने ईरान के सस्ते ड्रोन

वॉशिंगटन । अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जारी युद्ध में ईरान के सस्ते कामिकेज ड्रोन्स ने सैन्य रणनीति और अर्थशास्त्र के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सेना के लिए ये ड्रोन सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हो रहे हैं, क्योंकि ईरान द्वारा महज 20-30 हजार डॉलर की लागत से तैयार किए गए एक ड्रोन को गिराने के लिए अमेरिका को थाड या पैट्रियट जैसी करोड़ों डॉलर की इंटरसेप्टर मिसाइलें दागनी पड़ रही हैं। यह युद्ध के मैदान में एक ऐसा आत्मघाती खेल बन गया है, जहां हमलावर कम निवेश कर रक्षक का खजाना खाली कर रहा है। हालांकि, इस आर्थिक चुनौती का समाधान अब अमेरिका के मित्र देश ब्रिटेन ने ढूंढ निकाला है।

ब्रिटेन की नई तकनीक ड्रैगनफायर रेजर इन दिनों वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां एक मिसाइल दागने की कीमत करोड़ों में होती है, वहीं ड्रैगनफायर लेजर का एक शॉट महज 10 पाउंड (लगभग 1000रुपये) का है। यानी एक सैंडविच या पिज्जा की कीमत में दुश्मन के घातक ड्रोन का काम तमाम किया जा सकता है। यह लेजर डायरेक्टेड एनर्जी वेपन तकनीक बारूद या मिसाइल के बजाय लाइट बीम का इस्तेमाल करती है, जिसे ब्रिटेन की प्रमुख रक्षा कंपनियों एमबीडीए, लियोनार्डो और क्विनिटिक ने मिलकर विकसित किया है।

तकनीकी रूप से ड्रैगनफायर एक क्रांतिकारी हथियार है। इसकी मारक क्षमता इतनी सटीक है कि यह एक किलोमीटर की दूरी से एक रुपये के सिक्के जितने छोटे लक्ष्य को भी भेद सकता है। इसमें 50 किलोवाट श्रेणी की एक हाई-पावर लेजर बीम का उपयोग होता है, जो कई फाइबर लेजर को जोड़कर बनाई जाती है। यह बीम लक्ष्य की सतह पर इतनी भीषण गर्मी पैदा करती है कि धातु पल भर में पिघल जाती है और ड्रोन हवा में ही बिखर जाता है। चूंकि यह प्रकाश की गति से प्रहार करता है, इसलिए दुश्मन के ड्रोन को संभलने का एक मिलीसेकंड का समय भी नहीं मिलता।

लागत के मोर्चे पर यह तकनीक अमेरिका के थाड सिस्टम से कहीं आगे है। थाड की एक मिसाइल की लागत लगभग 12-15 मिलियन डॉलर (100-120 करोड़ रुपये) होती है, जिसे सस्ते ड्रोन्स पर इस्तेमाल करना मक्खी मारने के लिए तोप चलाने जैसा महंगा सौदा है। ड्रैगनफायर की सबसे बड़ी खूबी इसका असीमित गोला-बारूद है; जब तक बिजली की आपूर्ति जारी है, यह फायर करता रह सकता है। यद्यपि यह फिलहाल बैलिस्टिक मिसाइलों के बजाय ड्रोन्स, मोर्टार और क्रूज मिसाइलों जैसे सॉफ्ट टारगेट्स के लिए सर्वोत्तम है, लेकिन यह युद्ध की पूरी आर्थिक नीति को बदलने की क्षमता रखता है। ब्रिटेन ने इसे 2027 तक अपने रॉयल नेवी युद्धपोतों पर तैनात करने का लक्ष्य रखा है, जो भविष्य के युद्धों में गेम-चेंजर साबित होगा।

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