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ट्रंप की धमकी से नहीं डरा ईरान

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को धमका रहे हैं। लेकिन ईरान है कि उन्हे गंभीरता से लेने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि औसतन 40-40 मिनिट में 11-11 हमले ईरान कर रहा है। ऐसे ही हमले इजराइल पर किए हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी आक्रामक विदेश नीति और तेल संसाधनों को लेकर कड़े रुख के कारण वैश्विक चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी और वहां के तेल संसाधनों पर प्रभाव जमाने के बाद, ट्रंप का अगला बड़ा निशाना ईरान रहा है। 28 फरवरी को इजराइल के साथ मिलकर शुरू किए गए हमलों के 34वें दिन भी ईरान पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आया है, लेकिन ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका इस युद्ध को जीतने के कगार पर है।

राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी हमलों ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य ढांचे को लगभग ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि युद्ध अब अंतिम चरण में है और ईरान के पास अब कोई प्रभावी नेतृत्व नहीं बचा है। हालांकि, सबसे चौंकाने वाला बयान उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि होर्मुज के रास्ते तेल की आवाजाही बहाल करना उनके युद्ध के लक्ष्यों में शामिल नहीं था। उन्होंने कहा, होर्मुज जिसकी समस्या है, वही इसे देखे। अमेरिका के पास पर्याप्त तेल है, और यदि किसी को चाहिए तो वह हमसे ले सकता है, अन्यथा खुद जाकर होर्मुज से अपना रास्ता साफ करे।

इधर, युद्ध के मैदान में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। जहां एक ओर अमेरिका वार्ता का दावा कर रहा है, वहीं ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने सीधी बातचीत से इनकार किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के दावों को झूठा करार दिया है। ईरान के भीतर की खबरें संकेत दे रही हैं कि वहां निर्वाचित सरकार पंगु हो गई है और अब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ही सारे फैसले ले रही है।ट्रंप के युद्ध खत्म करने के संकेतों के बीच, बुधवार को ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। साथ ही, ईरान समर्थित हिज्बुल्ला ने इजराइल के उत्तरी इलाकों पर रॉकेट दागकर तनाव को और बढ़ा दिया है। जवाब में इजराइल ने भी लेबनान सीमा पर जोरदार बमबारी की है। फिलहाल, अमेरिका जल्द ही इस युद्ध से बाहर निकलने की तैयारी में है, भले ही होर्मुज का मार्ग पूरी तरह न खुला हो।

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