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विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक में नेतृत्व का मुद्दा एक बार फिर गरमाया

नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक में नेतृत्व का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। लोकसभा चुनावों के बाद सुस्त पड़े गठबंधन के भीतर अब कमान बदलने और सक्रियता बढ़ाने को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) ने गठबंधन के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और यह स्पष्ट होना चाहिए कि भविष्य में गठबंधन की कमान कौन संभालेगा। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भी उद्धव ठाकरे गुट की इस मांग का समर्थन किया है। इस विवाद को हवा तब मिली जब कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिदंबरम ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि गठबंधन का संयोजक पद रोटेशन (बारी-बारी) के आधार पर हर साल बदलना चाहिए था। चिदंबरम ने तर्क दिया कि यदि गठबंधन का नेतृत्व किसी प्रमुख राष्ट्रीय दल की बजाय क्षेत्रीय दलों के पास होता, तो यह अधिक सफल हो सकता था। उन्होंने सुझाव दिया कि नीतीश कुमार के बाद ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे या एम.के. स्टालिन को संयोजक बनाया जाना चाहिए था। उन्होंने इसे राजनीतिक रूप से परिपक्व कदम बताया।

शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने गठबंधन की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि इंडिया ब्लॉक केवल चुनाव आने पर ही सक्रिय होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव बीतने के बाद सहयोगियों के बीच कोई संवाद नहीं होता। राउत ने मणिपुर हिंसा, किसानों की आत्महत्या और अमेरिका के साथ व्यापार सौदों जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि इन पर केवल संसद में आवाज उठाना काफी नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब राहुल गांधी को संसद में बोलने नहीं दिया जाता, तो क्या गठबंधन जमीन पर उतरकर कुछ करने की योजना बना रहा है? राउत ने मांग की कि गठबंधन को चुनाव से बहुत पहले ही सक्रिय और सतर्क रहना चाहिए।

दूसरी ओर, टीएमसी के भीतर से ममता बनर्जी को नेतृत्व सौंपने की आवाजें बुलंद होने लगी हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर विमान बनर्जी ने संजय राउत के बयान का समर्थन करते हुए ममता बनर्जी को इंडिया ब्लॉक का स्वाभाविक नेता बताया। हालांकि, टीएमसी नेता कुणाल घोष ने स्पष्ट किया कि उनकी वर्तमान प्राथमिकता बंगाल में बीजेपी को हराकर ममता बनर्जी को चैथी बार मुख्यमंत्री बनाना है, क्योंकि उनका बंगाल मॉडल ही बीजेपी को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।

इस बहस के बीच डीएमके और कांग्रेस ने संतुलित रुख अपनाया है। डीएमके प्रवक्ता टीकेएस इलंगोवन ने संजय राउत के बयान को उनकी निजी राय बताते हुए कहा कि राहुल गांधी और ममता बनर्जी अपने-अपने स्तर पर सरकार के खिलाफ मजबूती से लड़ रहे हैं। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि संजय राउत एक वरिष्ठ नेता हैं और उनके सुझावों पर गठबंधन के सभी सहयोगी मिलकर विचार करेंगे। बीजेपी ने इस आंतरिक कलह पर तंज कसने में देरी नहीं की। केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि विपक्षी दल अब समझ चुके हैं कि राहुल गांधी उनके लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गए हैं। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि चार साल तक राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश करने के बाद मिली हार ने सहयोगियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। फिलहाल, नेतृत्व का यह जिन्न गठबंधन के भविष्य और एकजुटता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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