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युद्ध के असर से कमोडिटी बाजारों में भारी गिरावट

नई दिल्ली । वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट के चलते वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल तेज हो गई है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेजी से भारत जैसे आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका गहरा गई है। युद्ध के चलते वैश्विक कमोडिटी बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा है।

मार्च महीने में प्रमुख सूचकांक में दो अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जिसकी बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली रही। कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली तिमाही बाजार के लिए कई वर्षों में सबसे कमजोर साबित हुई है। ऊर्जा कीमतों में उछाल से कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका है, जिससे उनके मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। विशेष रूप से उन सेक्टरों पर असर अधिक दिख सकता है, जो कच्चे माल और ईंधन पर ज्यादा निर्भर हैं। इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट में बाधा के कारण उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे आने वाले बुवाई सीजन और खाद्यान्न उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है। हालांकि, इस नकारात्मक माहौल के बावजूद ब्रोकरेज हाउस और विश्लेषक पूरी तरह निराश नहीं हैं। उनका मानना है कि मौजूदा संकट अस्थायी है और हालात सामान्य होने पर बाजार में सुधार संभव है। अगले एक साल के लिए बाजार के अनुमानित लक्ष्य में बहुत मामूली कटौती की गई है, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट के बीच चुनिंदा सेक्टरों और मजबूत कंपनियों में निवेश के अवसर भी उभर सकते हैं, खासकर वे जो कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी से लाभान्वित हो सकती हैं।


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