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युद्ध की भीषण मार: खाड़ी देशों में फंसे हजारों भारतीय

दिल्ली। अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच छिड़ी विनाशकारी जंग का सबसे खौफनाक मंजर खाड़ी देशों में देखने को मिल रहा है। इस युद्ध की सीधी मार वहां रह रहे हजारों प्रवासी भारतीयों पर पड़ रही है, जो इस समय दहशत और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं। खाड़ी देशों, विशेषकर दुबई और अबूधाबी में आसमान से गिरती मिसाइलें, कान फाड़ देने वाले धमाके और मोबाइल फोन पर लगातार बजते वॉर अलर्ट के सायरन ने लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि लोग अपनी जान बचाने के लिए हफ्तों का राशन जमा कर घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

दुबई और अबूधाबी जैसे आधुनिक शहरों से जो तस्वीरें और खबरें सामने आ रही हैं, वे रूह कंपा देने वाली हैं। वहां रह रहे भारतीयों ने बताया कि पाम जुमेराह जैसे पॉश इलाकों में धमाकों के बाद अफरा-तफरी का माहौल है। चम्पावत के रहने वाले नवीन सिंह बोहरा ने अबूधाबी से अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कभी ऐसी लाइव जंग नहीं देखी। उनके फ्लैट के ठीक ऊपर से मिसाइलें गुजर रही हैं और जमीन से टकराते ही धरती हिल जाती है। आसमान में छाये काले धुएं के गुबार को देखकर लोग डरे हुए हैं। टिहरी और डोबरा-चांटी के प्रवासियों ने बताया कि शनिवार की रात सबसे खौफनाक थी, जब उन्हें कई बार अपनी इमारतों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। युद्ध के कारण दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। डिपार्टमेंटल स्टोरों पर राशन, दवाइयों और पानी के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है।

कई जगहों पर सब्जियों और बुनियादी सामान की भारी किल्लत हो गई है। कंपनियों ने अपनी साइट्स पर काम रोक दिया है और मजदूरों को सुरक्षित कैंपों में भेज दिया है। सबसे ज्यादा चिंता ईरान में फंसे भारतीयों को लेकर है, क्योंकि वहां इंटरनेट सेवाएं बंद होने के कारण परिजनों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। हरिद्वार और देहरादून के दर्जनों छात्र और परिवार ईरान में फंसे हुए हैं, जिनसे पिछले 24 घंटों से कोई बात नहीं हो पाई है, जिससे उनके माता-पिता और सगे-संबंधी गहरे सदमे में हैं। इस वैश्विक संकट के बीच उत्तराखंड सरकार ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी है। राज्य की विशेष सचिव (गृह) निवेदिता कुकरेती ने बताया कि सरकार घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रही है और केंद्र सरकार के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल, राज्य का गृह मंत्रालय उन सूचनाओं और कॉल्स का डेटा जुटा रहा है जो सहायता के लिए आ रही हैं। विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा और उनकी वापसी का मामला प्राथमिक रूप से केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के अधीन है। प्रभावित परिवार फिलहाल विदेश मंत्रालय के पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज करा रहे हैं और अपनों की सुरक्षित घर वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं।

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