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16वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन पर होगी दुनिया की नजर

नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची आज, बुधवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर दिल्ली पहुंचेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत आ रहीं ताकाइची, पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी इस पहली यात्रा के दौरान 16वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा करने और उन्हें और मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा। साथ ही, दोनों पक्षों के आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है, जिसमें विशेष रूप से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा।

विदेश मंत्रालय (एमईए) द्वारा जारी एक बयान में इस यात्रा के महत्व को रेखांकित किया गया है। इसमें कहा गया है कि यह दौरा अगस्त 2025 में 15वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी की टोक्यो यात्रा के बाद हो रहा है, जो भारत-जापान की विशेष रणनीतिक व वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह यात्रा न केवल दोनों देशों के राजनयिक संबंधों को गति देगी, बल्कि साझा मूल्यों और हितों पर आधारित सहयोग को भी बढ़ावा देगी। हाल के महीनों में, दोनों देशों के नेताओं के बीच उच्च-स्तरीय संवाद लगातार जारी रहा है, जो इस साझेदारी की सक्रियता को दर्शाता है। इसी साल 16 जून को फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सनाए ताकाइची से मुलाकात की थी। उस मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया था कि भारत और जापान व्यापार और निवेश को प्राथमिकता देते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में अपने संबंधों को और मजबूत करना जारी रखेंगे। इससे पहले, मई में जापान के विदेश मंत्री तोशीमित्सु मोतेगी ने दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की अहम भूमिका को दोहराया था। दोनों देशों के बीच सहयोग के दायरे में सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, निवेश, नवाचार और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान जैसे कई प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। जापान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि दोनों पक्ष एक विकसित स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के तहत एक मजबूत और समृद्ध इंडो-पैसिफिक बनाने की दिशा में सहयोग करने पर सहमत हुए हैं।

दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के साथ-साथ निवेश, नवाचार और ज्ञान के आदान-प्रदान के जरिए आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों में ठोस नतीजे हासिल करने की पुष्टि की है। यह संयुक्त विजन, जिसका आधार पिछले साल पीएम मोदी की जापान यात्रा के दौरान घोषित अगले 10 वर्षों के जापान-भारत संयुक्त विजन में है, क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। भारत और जापान के बीच की दोस्ती का एक लंबा और गहरा इतिहास रहा है, जो आध्यात्मिक जुड़ाव, मजबूत सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों पर आधारित है। बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक प्रभाव से लेकर आधुनिक रणनीतिक गठजोड़ तक, दोनों देशों ने हमेशा एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग का भाव रखा है। 


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