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धोखेबाज पाकिस्तान में नहीं है मध्यस्थता की क्षमता-इजरायल

नई दिल्ली। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने पाकिस्तान को लेकर एक बड़ा और तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी भारी तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें कर रहा पाकिस्तान बिल्कुल भी विश्वास के काबिल नहीं है। इजरायली राजदूत ने पाकिस्तान को एक अत्यंत अविश्वसनीय और केवल मुसीबतें खड़ी करने वाला देश करार दिया। गौरतलब है कि पाकिस्तान पिछले कुछ समय से ईरान और अमेरिका के बीच जारी गतिरोध को सुलझाने और बातचीत कराने के लिए लगातार मध्यस्थता करने का दावा कर रहा है, जिसे अमेरिकी प्रशासन की तरफ से भी स्वीकार किया गया है।

इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने दो टूक शब्दों में कहा कि कूटनीति में किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद की मध्यस्थता करने के लिए सबसे पहले एक ऐसे पक्ष या देश की आवश्यकता होती है जिस पर सभी को पूरा भरोसा हो। उन्होंने साफ किया कि यह विश्वसनीयता और योग्यता पाकिस्तान के पास कतई नहीं है। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्काे रूबियो ने बयान दिया था कि ईरान के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान द्वारा की जा रही कूटनीतिक मध्यस्थता पर भारत ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है। इस पर टिप्पणी करते हुए इजरायली राजदूत ने कहा कि आपत्ति की बात अलग है, लेकिन हकीकत यह है कि पाकिस्तान के भीतर ऐसी कोई क्षमता ही मौजूद नहीं है।

राजदूत ने पाकिस्तान की भूमिका पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मध्यस्थता करने वाला देश खुद ही कट्टरपंथियों और चरमपंथ का खुला समर्थक हो, तो ऐसी शांति वार्ताओं का क्या परिणाम निकलने वाला है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पाकिस्तान का झुकाव हमेशा से वैश्विक आतंकवाद और रूढ़िवादी ताकतों की तरफ रहा है। ऐसे में अमेरिका को भी पूरी तरह सतर्क रहने की आवश्यकता है और उसे पाकिस्तान जैसे मुल्क के कूटनीतिक झांसे में बिल्कुल नहीं आना चाहिए। पिछले महीने जब अमेरिकी विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आए थे, तब भी पाकिस्तान को लेकर द्विपक्षीय बातचीत हुई थी, लेकिन वह चर्चा पूरी तरह आतंकवाद को खत्म करने पर केंद्रित थी। उस दौरान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता के विषय पर भारत के साथ कोई चर्चा नहीं की गई।

इसके साथ ही राजदूत अजार ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रिश्तों के बीच आई दरार की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग इन दोनों शीर्ष नेताओं के बीच फूट पड़ने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, उन्हें अभी लंबा इंतजार करना होगा। लेबनान में जारी सैन्य अभियान को लेकर दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई कथित तीखी बहस को उन्होंने केवल मैत्रीपूर्ण रणनीतिक मतभेद बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें अपने निजी राजनीतिक एजेंडे के तहत इन सामान्य मतभेदों को बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही हैं, जबकि दोनों देशों के रिश्ते पूरी तरह अटूट हैं।

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