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हरियाली तीज स्पेशल

भारतीय संस्कृति में सावन का महीना एक अलग ही जादू लेकर आता है। तपती गर्मी के बाद जब आसमान से बारिश की बूंदें धरती पर गिरती हैंए तो प्रकृति एक नई चादर ओढ़ लेती है। चारों तरफ फैली इसी हरियाली का जश्न मनाने का त्योहार है हरियाली तीज। यह मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं का त्योहार है जो भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

हरियाली तीज केवल एक व्रत या पूजा नहीं हैए बल्कि यह सखियों के साथ मिलकर खुशियां बांटनेए सजने.संवरने और सावन के उल्लास को महसूस करने का दिन है। आइएए इस त्योहार के उन खास पहलुओं पर नज़र डालते हैं जो इसे इतना खास बनाते हैंरू

1. हाथों में रची मेहंदी की महक

तीज का नाम आते ही सबसे पहले जेहन में जो बात आती हैए वह हैकृ मेहंदी। हरियाली तीज पर महिलाओं का सोलह श्रृंगार मेहंदी के बिना बिल्कुल अधूरा माना जाता है। सावन की शुरुआत के साथ ही बाजारों में मेहंदी लगाने वालों की भीड़ लग जाती है। माना जाता है कि मेहंदी का रंग जितना गहरा होता हैए पति.पत्नी का प्रेम भी उतना ही गहरा होता है। इस दिन महिलाएं एक.दूसरे के हाथों में अरेबिकए राजस्थानीए मंडला और कई तरह के नए डिज़ाइन वाली मेहंदी रचाती हैं। मेहंदी की वह भीनी.भीनी खुशबू पूरे घर के वातावरण को एक अलग ही उत्सवी रंग में रंग देती है।

बाजार में सबसे ज्यादा ट्रेंडिंग मेहंदी डिजाइन


2. सावन के झूले और सखियों का साथ

"सावन आया, झूम के गाओ, पेड़ों पर अब पींग बढ़ाओ!"

सावन और झूलों का सदियों पुराना नाता है। हरियाली तीज के मौके पर बाग.बगीचोंए घरों के आंगनों और पेड़ों की डालियों पर रस्सियों वाले पारंपरिक झूले डाले जाते हैं। रंग.बिरंगे परिधानों और हरी साड़ियों में सजी महिलाएं जब इन झूलों पर पींग बढ़ाती हैंए तो ऐसा लगता है मानो वे आसमान को छू लेना चाहती हैं। 

झूला झूलते हुए गाए जाने वाले सावन के पारंपरिक लोकगीतए मल्हार और हंसी.ठिठोली इस दिन की रौनक को दोगुना कर देते हैं।


3. घेवर और गुजिया की लाजवाब मिठास

भारत में कोई भी त्योहार बिना मिठाइयों के पूरा नहीं हो सकताए और हरियाली तीज की तो पहचान ही श्घेवरश् से है। जालीदार और चाशनी में डूबा हुआ मलाई घेवर या रबड़ी घेवर सावन की सबसे बड़ी सौगात है। मायके से ससुराल आने वाले श्सिंधारेश् में घेवर का होना सबसे ज़रूरी माना जाता है।

घेवर के साथ.साथ इस मौसम में गुजिया और शक्करपारे का भी अपना अलग ही मजा है। घर की रसोई से आती देसी घी और इलायची की महकए और फिर पूरे परिवार का एक साथ बैठकर इन मिठाइयों का आनंद लेनाए तीज की मिठास को रिश्तों में भी घोल देता है।

निष्कर्ष

हरियाली तीज सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं हैए बल्कि यह महिलाओं के लिए खुद को समय देनेए सजने.संवरने और अपनी सखियों के साथ बेफिक्र होकर हंसने.गाने का एक खूबसूरत बहाना है। हरे रंग की चूड़ियांए हाथों में रची मेहंदीए हवा में उड़ते झूले और घेवर की मिठासकृ ये सब मिलकर हरियाली तीज को भारतीय पंचांग का सबसे जीवंत और खुशनुमा त्योहार बनाते हैं।

आप सभी को हरियाली तीज की ढेरों शुभकामनाएं! सावन की यह फुहार आपके जीवन में हमेशा हरियाली और खुशियां बनाए रखे।

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