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सरकार का ईवी पर जोर, ऑटो पीएलआई प्रोत्साहन दोगुना होगा

नई दिल्ली। भारी उद्योग मंत्रालय देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और उन्नत ऑटोमोबाइल तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय है। मंत्रालय को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में ऑटोमोबाइल उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत लगभग 4,700 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा, जो पिछले दो वर्षों (2,322 करोड़ रुपये) में दिए गए कुल प्रोत्साहन से दोगुना से भी अधिक है। इसके साथ ही, मंत्रालय ई-बस और ई-ट्रक जैसे भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए वित्तपोषण में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए एक नई वित्तीय व्यवस्था पर भी विचार कर रहा है, जिसमें ब्याज सब्सिडी देने का प्रस्ताव शामिल है। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में अनुमानित 4,700 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि में से लगभग 700 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं, शेष राशि आने वाले महीनों में जारी होगी। 

ऑटोमोबाइल पीएलआई योजना, जिसका कुल परिव्यय 25,938 करोड़ रुपये है, का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहनों और उन्नत ऑटोमोबाइल तकनीक से जुड़े पुर्जे (जैसे ट्रैक्शन मोटर और एंगल एनकोडर) बनाने वाली कंपनियों को प्रोत्साहित करना है। योजना की अवधि बढ़ाकर अब वित्त वर्ष 2028-29 तक कर दी गई है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि योजना के तहत 42,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक 45,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हो चुका है, जो योजना की सफलता का प्रमाण है। हालांकि, ईवी क्षेत्र के विस्तार में वित्तपोषण एक बड़ी बाधा बनकर उभरा है, खासकर ई-बस और ई-ट्रक ऑपरेटरों के लिए। बैंकों को ईवी की नई तकनीक, रीसेल मार्केट की कमी और बैटरी की उम्र को लेकर अनिश्चितता के कारण कर्ज देने में हिचकिचाहट हो रही है। परिणामस्वरूप, ईवी के लिए ब्याज दरें डीजल वाहनों की तुलना में काफी अधिक होती हैं। उद्योग ने इस अंतर को पाटने के लिए सरकार से ब्याज पर सब्सिडी देने का सुझाव दिया है, जिसके तहत सरकार कर्ज की ब्याज लागत का एक हिस्सा वहन करे।

यह प्रस्तावित व्यवस्था मुख्य रूप से 3.5 से 55 टन क्षमता वाले ई-ट्रकों पर केंद्रित होगी, जहां ईवी की पहुंच अभी नगण्य है। भारत में अब तक इस श्रेणी के 1,000 से भी कम ई-ट्रक बिके हैं, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में कुल 9.5 लाख से अधिक ट्रक बिके थे। ट्रकों की ईंधन खपत में भारी हिस्सेदारी को देखते हुए ई-ट्रकों को बढ़ावा देना आवश्यक माना जा रहा है।


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