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ईरान से मुआवजे की मांग पर अड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सामने एक नया दांव चलते हुए उससे भारी मुआवजे की मांग की है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ईरान के साथ किसी भी प्रकार की शांति वार्ता तभी आगे बढ़ेगी, जब तेहरान अमेरिका की इस मांग को पूरा करेगा। इस कड़े रुख के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है।डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा कि उन्हें यह विचार बेहद दिलचस्प लगा कि ईरान पिछले कुछ महीनों में हुए नुकसान के बदले मुआवजे की मांग कर रहा है। इसके जवाब में वह भी ईरान से बड़ा मुआवजा मांगेंगे। 

ट्रंप ने अक्टूबर 2000 में यमनी बंदरगाह पर अमेरिकी नेवी के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस कोल पर हुए घातक बम विस्फोट का जिक्र करते हुए इसके लिए भी ईरान को जिम्मेदार ठहराया। इस पुरानी घटना में 17 अमेरिकी नाविक मारे गए थे और दर्जनों घायल हुए थे। ट्रंप ने कहा कि वह यह मुआवजा उन सभी लोगों के परिवारों के लिए मांग रहे हैं, जिन्हें ईरान समर्थित सड़क किनारे के बमों और विभिन्न हमलों में जान गंवानी पड़ी या जो गंभीर रूप से घायल हुए। इसमें जनरल सुलेमानी के कार्यकाल की घटनाएं, यूएसएस कोल के पीड़ित और पिछले 50 वर्षों में सार्वजनिक आंदोलनों के दौरान मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिजन शामिल हैं। इसके साथ ही पिछले महीनों में प्रभावित हुए हजारों अन्य लोगों के परिवारों को भी इस मुआवजे का हकदार बताया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं कि भविष्य की किसी भी बातचीत में इस मुआवजे के मुद्दे को प्रमुखता से शामिल किया जाए। हालांकि, दूसरी तरफ ईरान ने भी अपनी शर्तें रख दी हैं। तेहरान का कहना है कि जब तक खाड़ी क्षेत्र से अमेरिकी नाकाबंदी नहीं हटाई जाती, युद्ध नुकसान का मुआवजा नहीं दिया जाता, आर्थिक प्रतिबंध समाप्त नहीं होते और ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी नहीं किया जाता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला जाएगा। एक अन्य बयान में ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत की प्रक्रिया को धीमा कर रहा है और मुख्य रूप से आर्थिक दबाव का सहारा ले रहा है। उन्होंने कहा कि वे ईरान की बिगड़ती आर्थिक स्थिति और महंगाई पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे वहां के नेताओं को मजबूरन समझौते की टेबल पर आना पड़ेगा। ट्रंप ने इस कूटनीतिक चाल को शतरंज का खेल करार देते हुए कहा कि अंततः सब ठीक हो जाएगा।

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