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जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों की ऐतिहासिक जीत

नई दिल्ली। दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रसंघ बहाल करने और अन्य मांगों को लेकर पिछले 18 दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन आखिरकार सफल हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है, जिसके बाद छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी और परिसर में जश्न का माहौल बन गया। साल 2006 के बाद से इस केंद्रीय विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए थे, जिसे लेकर छात्र लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे।

विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद हुए समझौते के तहत, 15 मई 2027 तक छात्रसंघ का संविधान तैयार कर उसे पूरा करने का निर्देश दिया गया है। संविधान निर्माण के लिए गठित होने वाली समिति में केवल प्रोफेसर और कानूनी विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि विभिन्न संकायों से चुने गए छात्र प्रतिनिधि भी शामिल होंगे ताकि लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होने के छह सप्ताह के भीतर यानी लगभग जुलाई 2027 के मध्य तक लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप छात्रसंघ चुनाव कराए जाने का वादा किया गया है।

आंदोलन के दौरान प्रशासन द्वारा छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई, शो-कॉज नोटिस और कैंपस में प्रवेश पर लगाई गई सभी तरह की रोक को भी तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया है। इस ऐतिहासिक जीत से छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेताओं ने इसे सत्य और छात्रों के अधिकारों की बड़ी जीत करार दिया है।

दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने सामान्य गतिविधियों को बहाल करते हुए 2 नवंबर से सभी कक्षाएं और परीक्षाएं ऑफलाइन माध्यम से दोबारा शुरू करने का आधिकारिक नोटिस भी जारी कर दिया है। फिलहाल दिवाली की छुट्टियों के चलते छात्रों को 8 नवंबर तक वापस लौटने का अनुरोध किया गया है, जिसके तुरंत बाद सुचारू रूप से ऑफलाइन कक्षाएं संचालित की जाएंगी। प्रशासन के इस फैसले से विश्वविद्यालय में शांति और शैक्षणिक माहौल लौटने की उम्मीद बंध गई है।



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