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राम सभी रिश्तों का सम्मान करते थे चाहें भाई का हो या सिता माँ या दोस्त सुग्रीव । उन्होंने अपने पिता के सम्मान की रक्षा के लिए स्वेच्छा से 14 वर्ष जंगल में बिताने का निर्णय लिया। इस समय उनके सौतेले भाई लक्ष्मण भी उनके साथ वनवासियों के पास गये। राजा दशरथ की तीन पत्नियाँ और चार पुत्र थे; वे सभी एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। उनका प्रेम इतना पवित्र था कि भले ही वे शारीरिक रूप से अलग थे, लेकिन उनके दिल एक थे। राम के एक अन्य भाई भरत को शक्तिशाली सिंहासन दिया गया था, लेकिन उन्होंने कभी भी स्वयं को राजा नहीं माना। इसके बजाय, उन्होंने राम के घर लौटने की प्रतीक्षा की और उन्हें राज्य लौटा दिया। हम सबके लिए यही सीख है कि हमें हमेशा एक परिवार के रूप में एकजुट रहना चाहिए। एकता के फल हमें सबसे बुरे तूफानों से पार पाने की शक्ति देंगे। हर रिश्ता हमारे लिए लालच, क्रोध और शक्ति से ऊपर उठने का एक अवसर है। यदि हम प्रेम को अन्य सभी चीजों से ऊपर मानेंगे तो जीवन के प्रति हमारा मूल्य और सम्मान स्वतः ही बढ़ जाएगा। इसके अलावा, यह हमारी आत्मा को शुद्ध करता है और हमें अच्छे कर्म के मार्ग पर अग्रसर करता है।
राम बहुत विनम्र और दयालु थे, इसलिए वह सभी के साथ समान व्यवहार करते थे। उन्होंने तुरन्त ही वे फल भी खा लिए जो बेचारी बूढ़ी शबरी ने खाए थे, जिसके पास देने के लिए शुद्ध प्रेम के अलावा कुछ भी नहीं था। इससे हमें यह सीख मिलती है कि हमें सभी से प्रेम करना चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए। जाति, धर्म, रंग या स्थिति के आधार पर किसी के साथ भेदभाव न करें। भगवान राम ने टीमवर्क पर जोर दिया। उनके समूह में बंदर, भालू और मनुष्य शामिल थे, जिससे वे अच्छे योद्धा बन गये। वह एक सुलभ टीम लीडर थे।वर्तमान परिदृश्य में, संस्कृति भ्रष्ट मानसिकता, दुख, असंतोष, तनाव, आंतरिक राजनीति, हितधारकों की ईर्ष्या और अनैतिक व्यवहार से ग्रस्त है। भगवान राम ने धर्म का परित्याग किए बिना किस प्रकार कठिन परिस्थितियों को संभाला,इसमें यह भी बताया गया है कि किस प्रकार उन्होंने एक अच्छे पुत्र, भाई, पति, मित्र, शत्रु और महान शासक के रूप में अपना चरित्र दर्शाया।भारत के लोग उन्हें राजा राम के रूप में पूजते हैं,अपने उत्कृष्ट गुणों के लिए जाने जाते हैं।
राम ही मेरा धर्म है शरीर का नाश होना एक दिन तय है अतः मेरे लिए गुरु का त्याग व उनका आशीर्वाद ही मुझे एक अच्छा इंसान बना सकता है आज समाज में जो नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है वो कहीं ना कहीं धर्म को पूर्ण रूप से पालन नहीं करने के कारण हो रहा किसी को दूसरे की चिंता नहीं अपनी चिंता ज्यादा है जब सभी को मालूम है कि हमें किसी भी राजनीति पार्टी पर भरोसा नहीं करनी चाहिए थी वो पहले से ही आतंकवाद का गढ़ रहा है और अभी नई सरकार भी आई है आप को इसमें किसी की बात ना सुनकर पहले ऐ सोचना जरुरी था क्या वहाँ का माहौल सही में शांत हो गया है डेली न्यूज में तो दिखा रहा है कि रोज जवान मारे जा रहें हैं जम्मू काश्मीर भारत का अभिन्न अंग है ऐ होना ही है लेकिन सिर्फ बरसाती मेढकों की तरह भाषण देने से नहीं बल्कि हिम्मत और ताकत के बल पर ही होगा. जो भगवान राम ने बताया है कि रावण का अंत ताकत और जूनून से किया जो अन्याय के खिलाफ था और इन्ही सबो से प्रेरणा लेकर एक एक से महान गुरू ने संदेश भी दिया कि जीवन में मौत निश्चित है अतः भगवान राम का नाम लेकर मरते हो या कट्टरपंथी गुटों के द्वारा जो धर्म को बदनाम करते हैं।
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