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नई दिल्ली । भारत द्वारा सिंधु नदी प्रणाली से जुड़े दो बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किए जाने की खबरों ने पाकिस्तान की बेचौनी को बेहद बढ़ा दिया है। पाकिस्तान अब खुलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों और मीडिया के सामने यह कहने लगा है कि भारत का यह कदम उसकी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत की चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना और सलाल बांध से जुड़ी नई सुरंग परियोजना पर अत्यंत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस्लामाबाद का दावा है कि इन भारतीय जल परियोजनाओं के कारण उसके दीर्घकालिक आर्थिक और कृषि हितों को बहुत गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
दरअसल, हाल ही में सामने आई आधिकारिक जानकारियों के अनुसार भारत ने चिनाब नदी प्रणाली से जुड़ी दो बेहद महत्वपूर्ण परियोजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें पहली महत्वाकांक्षी परियोजना हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित चिनाब-ब्यास लिंक है, जबकि दूसरी जम्मू-कश्मीर स्थित सलाल जलविद्युत परियोजना में बेहतर तलछट प्रबंधन (सिल्ट मैनेजमेंट) के लिए एक नई बाईपास सुरंग का निर्माण है। इन दोनों ही परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत करीब 2,600 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इन योजनाओं की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक होने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने भारतीय टेंडर दस्तावेजों का अध्ययन किया है। पाकिस्तान का आरोप है कि चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना के जरिए चिनाब नदी से लगभग 1.9 मिलियन एकड़ फीट पानी ब्यास नदी बेसिन की ओर मोड़ दिया जाएगा, जिसे वह सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन मान रहा है।
पाकिस्तान का यह भी कहना है कि भारत ने इन परियोजनाओं के बारे में उसे कोई आधिकारिक पूर्व सूचना नहीं दी है और न ही कोई नोटिस साझा किया है। पाकिस्तान पानी को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगा रहा है। भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद का यह नया अध्याय ऐसे समय में शुरू हुआ है, जब भारत सरकार पहले ही सिंधु जल संधि को स्थगित रखने (अबेयंस में रखने) का कड़ा फैसला ले चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्पष्ट शब्दों में संदेश दिया था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते और भारत अपनी पश्चिमी नदियों पर अपने वैध हिस्से के पानी का पूरा उपयोग सुनिश्चित करेगा। इसी ठोस नीति के तहत चिनाब नदी से जुड़ी विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं को अब तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
सरकारी ब्लूप्रिंट के अनुसार, लगभग 2,300 करोड़ रुपये की लागत वाली चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना पर 1 अगस्त से निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है, जिसे 31 जुलाई 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की लाहौल घाटी में आकार लेगी, जिसके तहत चिनाब नदी पर 19 मीटर ऊंचा एक बैराज और पानी को दूसरी दिशा में ले जाने के लिए 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी। इसके साथ ही, जम्मू-कश्मीर के सलाल जलविद्युत परियोजना में लगभग 268 करोड़ रुपये की लागत से एक विशेष डायवर्जन-कम-सेडिमेंट बाईपास टनल बनाई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, चिनाब नदी अपने साथ भारी मात्रा में गाद (सिल्ट) लेकर आती है जिससे सलाल जलाशय की भंडारण क्षमता और टर्बाइनों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही थी। यह नई सुरंग इसी तकनीकी समस्या को दूर करेगी। स्पष्ट है कि भारत इन परियोजनाओं को रणनीतिक और तकनीकी रूप से जरूरी मानकर आगे बढ़ रहा है, जबकि पाकिस्तान को इसमें अपनी तबाही नजर आ रही है।
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