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साइप्रस के बहाने ग्रीस तक पहुंचेगी ब्रह्मोस

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बिसात पर भारत ने एक बहुत बड़ा दांव चला है, जिसने तुर्की और उसके सदाबहार दोस्त पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। हाल ही में भारत और साइप्रस के बीच रणनीतिक साझेदारी हुई है, जिसके तहत भारत की सबसे घातक मिसाइल ब्रह्मोस के साइप्रस और ग्रीस तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के हालिया साइप्रस दौरे ने इस पूरे घटनाक्रम में आग में घी का काम किया है, जिससे तुर्की के रणनीतिक और सुरक्षा हलकों में गहरा हड़कंप मच गया है। साइप्रस द्वारा भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और कामिकाजे ड्रोन्स खरीदने की गहरी दिलचस्पी दिखाने के बाद तुर्की पूरी तरह दहशत में है।

इस पूरे भू-राजनीतिक घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स ने भारत का दौरा किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक की। इसके तुरंत बाद भारतीय विदेश मंत्री भी साइप्रस पहुंचे, जिसके बाद दोनों देशों के बीच एक मजबूत रक्षा सहयोग रोडमैप तैयार किया गया। ताजा रक्षा रिपोर्ट्स के मुताबिक, साइप्रस ने दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक ब्रह्मोस के साथ-साथ भारत के घातक कामिकाजे ड्रोन, जैसे नागास्त्र-1 और स्काईस्ट्राइकर हासिल करने की इच्छा जताई है। यह संभावित ब्रह्मोस खरीद यूरोपीय संघ के विशेष रक्षा पैकेज के अंतर्गत मिलने वाले फंड से की जा सकती है।

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दाेगन और वहां के सैन्य विश्लेषकों के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि तुर्की ने दशकों से उत्तरी साइप्रस पर अवैध कब्जा कर रखा है। साइप्रस के पास ब्रह्मोस जैसी अचूक और मारक क्षमता आने से इस पूरे क्षेत्र का सैन्य संतुलन पूरी तरह से बदल जाएगा, जो सीधे तौर पर तुर्की की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। तुर्की के रक्षा विशेषज्ञों को डर है कि भारतीय हथियारों की मदद से साइप्रस और ग्रीस मिलकर तुर्की के खिलाफ एक अजेय रक्षा दीवार तैयार कर लेंगे। तुर्की के कूटनीतिक हलकों का मानना है कि भारत के लिए साइप्रस तो महज एक जरिया है, उसका असली मकसद अपनी ब्रह्मोस मिसाइल को ग्रीस तक पहुंचाना है, जिसके साथ तुर्की का पुराना समुद्री सीमा विवाद चल रहा है।

वास्तव में, नई दिल्ली का यह कदम भारत-पाक संघर्ष के दौरान तुर्की द्वारा पाकिस्तान को गुपचुप तरीके से सैकड़ों घातक ड्रोन मुहैया कराने और कश्मीर मुद्दे पर लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का साथ देने का एक करारा जवाब है। भूमध्य सागर में तुर्की की नाक के नीचे भारतीय हथियारों की संभावित तैनाती को भारत का एक बड़ा रणनीतिक पलटवार माना जा रहा है। चूंकि ब्रह्मोस मिसाइल मैक 2.8 से मैक 3 की सुपरसोनिक गति से अचूक हमला करने में सक्षम है, इसलिए इसकी मौजूदगी तुर्की के लिए एक बड़ा सैन्य दबाव पैदा करेगी। भारत और साइप्रस के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग (2026-2031) के लिए जो अहम रोडमैप तैयार हुआ है, उसने दोनों देशों को एक अटूट रणनीतिक साझेदार बना दिया है।इस तनाव के बीच तुर्की और ग्रीस के बीच पूर्वी एजियन सागर के द्वीपों को लेकर पुराना विवाद भी फिर से भड़क गया है। हाल ही में तुर्की के फाइटर जेट्स और सर्विलांस विमानों ने ग्रीस के हवाई क्षेत्र का बार-बार उल्लंघन किया, जिसके जवाब में ग्रीस के लड़ाकू विमानों ने तुरंत उड़ान भरी और दोनों देशों के जेट्स के बीच आसमान में ही छद्म युद्ध जैसी स्थिति देखने को मिली। इस घटना से बौखलाए तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलर ने धमकी भरे लहजे में कहा कि वे साइप्रस और एजियन सागर में अपने हितों से कोई समझौता नहीं करेंगे, जिसे ग्रीस ने सिरे से खारिज कर दिया। 


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