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सऊदी अरब पर हमले से खुली ‘मक्का पैक्ट’ की पोल

दुबई। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के दौरान ही सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष तेज हो गया है। सऊदी अरब की तरफ से दावा किया गया है कि हूती विद्रोहियों ने इस्लामिक दुनिया के पवित्र शहर मक्का को निशाना बनाने की कोशिश की है। इस पूरे घटनाक्रम में किरकिरी पाकिस्तान की हो रही है, जो कुछ महीने पहले इस्लामिक नाटो की परिकल्पना को साकार होने का सपना देख रहा था। अब जबकि सऊदी सरकार को सच में पाकिस्तान की जरूरत पड़ी है, तो पीएम शहबाज शरीफ केवल कड़ी निंदा करके बच निकलते हुए नजर आ रहे हैं। दूसरी तरफ इस्लामाबाद की तरफ से कहा गया है कि तथाकथित ‘मक्का डिफेंस पैक्ट’ केवल एक सुरक्षात्मक समझौता है।

पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी की टिप्पणी सामने आई है। अल अरबिया से बात करते हुए पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब के बीच हुआ समझौता पूरी तरह से सामूहिक प्रतिरोध पर आधारित है। पाकिस्तान की तरफ से ‘मक्का डिफेंस पैक्ट’ को लेकर यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब सऊदी अरब पूरी तरह से घिरा हुआ नजर आ रहा है। सऊदी अरब की तरफ से दावा किया गया है कि इस्लामिक दुनिया के पवित्र शहर मक्का पर ड्रोन से हमला करने की कोशिश की गई है। हालांकि, हूती विद्रोहियों की तरफ से ऐसे किसी भी हमले से इनकार किया गया है और इसे सऊदी अरब का प्रोपोगैंडा बताया।

सऊदी अरब पर हुए हमले के बीच भले ही ‘मक्का डिफेंस पैक्ट’ की पोल खुलती हुई नजर आ रही है, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान इसको बढ़ाकर दिखाने में कोई कमी नहीं छोड़ रहा है। पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता से जब इसके बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे लंबे समय के संबंधों का परिणाम बताया। चौधरी ने कहा, हमने जो सैन्य गठबंधन किया है, वह अचानक नहीं बना। यह गठबंधन इन देशों के बीच दशकों पुराने रणनीतिक संबंधों पर आधारित है। और पाकिस्तान के इन दोनों देशों के साथ संबंध खास हैं। उन्होंने आगे कहा कि सऊदी अरब और तुर्की के साथ पाकिस्तान के संबंध भावनात्मक जुड़ाव, सांस्कृतिक जुड़ाव है। इसके अलावा लोगों के बीच आपसी संबंधों और दशकों पुराने सैन्य जुड़ाव पर आधारित हैं।


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