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तृणमूल कांग्रेस के गढ़ फलता में प्रत्याशी ने पीछे खींचे कदम

कोलकाता । पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सबसे मजबूत सीटों में से एक मानी जाने वाली फलता विधानसभा सीट पर पार्टी को बड़ा झटका लगा है। फलता उपचुनाव से ठीक पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने मैदान से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। हालांकि, नामांकन वापस लेने की आधिकारिक समय-सीमा समाप्त होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और बैलेट पेपर पर उनका नाम और पार्टी का प्रतीक चिन्ह दर्ज रहेगा। चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, फलता उपचुनाव के लिए नाम वापसी की आखिरी तारीख 13 अप्रैल थी, जिसके चलते बैलेट पैनल पहले ही फाइनल किए जा चुके हैं और अब इनमें कोई बदलाव संभव नहीं है।

फलता विधानसभा सीट साल 2011 से ही लगातार तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य किला रही है। यहां हर चुनाव के साथ पार्टी की जीत का अंतर बढ़ता गया है। साल 2016 में जहां टीएमसी ने 13 प्रतिशत वोटों से जीत दर्ज की थी, वहीं 2021 में यह अंतर बढ़कर करीब 20 प्रतिशत तक पहुंच गया था। यह क्षेत्र डायमंड हार्बर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां से सांसद अभिषेक बनर्जी ने साल 2024 के लोकसभा चुनाव में 7.1 लाख वोटों के रिकॉर्ड अंतर से ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। इस मजबूत गढ़ में बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली के आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने फिर से मतदान (पुनर्मतदान) कराने का आदेश दिया था।

कदम पीछे खींचने पर राजनीतिक घमासान

चुनाव मैदान से हटने के अपने फैसले पर जहांगीर खान ने दावा किया कि उन्होंने फलता के विकास और शांति के लिए यह कदम उठाया है। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने क्षेत्र के विकास के लिए एक विशेष पैकेज देने का वादा किया है, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने पुनर्मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का निर्णय लिया। दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तंज कसते हुए कहा कि टीएमसी उम्मीदवार को क्षेत्र में कोई पोलिंग एजेंट तक नहीं मिला, जिसके कारण उन्हें मैदान छोड़कर भागना पड़ा।

टीएमसी ने फैसले से बनाई दूरी

पूरे चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खान ने फिल्मी अंदाज में पुष्पा झुकेगा नहीं का डायलॉग अपनाकर काफी सुर्खियां बटोरी थीं और पुलिस पर्यवेक्षक तक को खुली चुनौती दी थी। अब उनके अचानक पीछे हटने पर तृणमूल कांग्रेस ने इसे उनका निजी फैसला बताते हुए दूरी बना ली है। पार्टी ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि 4 मई को आए चुनाव परिणामों के बाद से ही पूरे निर्वाचन क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है, जिसके कारण परिस्थितियां बदली हैं।


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