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ट्रंप प्रशासन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को अब भी एक अहम रणनीतिक प्राथमिकता मानता है

वॉशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्काे रुबियो ने अपनी चार दिन की भारत यात्रा का इस्तेमाल क्वाड सहयोग को मजबूत करने और नई दिल्ली को यह भरोसा दिलाने के लिए किया कि ट्रंप प्रशासन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को अब भी एक अहम रणनीतिक प्राथमिकता मानता है। यह बात विश्लेषकों और बिजनेस जगत के लोगों ने बताई। यह रुबियो की अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में भारत की पहली यात्रा थी। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल कॉरपोरेशन के सीईओ डॉ. विवेक लाल ने इस यात्रा को बहुत सही समय पर हुई यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह दोनों देशों के लिए एक बार फिर रणनीतिक बातचीत करने और एक साझा रणनीतिक दिशा तय करने का बेहतरीन मौका है। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध अब एक अहम मोड़ पर पहुंच चुके हैं और रक्षा सहयोग, जरूरी समझौते और सैन्य अभ्यासों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यह रिश्ता बहुत रणनीतिक है। क्वाड के बारे में उन्होंने कहा कि यह समूह फिर से रफ्तार पकड़ रहा है। क्वाड में ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि क्वाड में जो नई ऊर्जा वापस आई है और जिन ठोस नतीजों की बात हो रही है, उससे आने वाले समय में इसे और ज्यादा ताकत और ध्यान मिलेगा। उन्होंने कहा कि कॉमन ऑपरेटिंग पिक्चर, निगरानी और सुरक्षा सहयोग क्वाड साझेदारी के अहम हिस्से हैं। यूएस इंडिया स्ट्रैटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम के अध्यक्ष और सीईओ मुकेश आघी ने कहा कि रुबियो की यात्रा से साफ होता है कि वॉशिंगटन की भू-राजनीतिक सोच में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की अहमियत लगातार बढ़ रही है। आघी के मुताबिक, अब क्वाड सिर्फ कूटनीतिक दिखावे तक सीमित नहीं है बल्कि यह आर्थिक और रणनीतिक सहयोग की ओर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, मजबूत सप्लाई चेन और नई तकनीकों पर मिलकर काम करने से भारत-अमेरिका साझेदारी और मजबूत होगी और एक खुला और स्थिर इंडो-पैसिफिक बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क और इंडो-पैसिफिक एनर्जी सिक्योरिटी इनिशिएटिव जैसे कदमों को निजी क्षेत्र के लिए बड़े मौके बताया। अउन्होंने कहा कि भारत की ओर से क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करना भी काफी अहम है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के बाहर पहली बार क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक भारत में होना अपने आप में बड़ा संदेश देता है। उनके मुताबिक रुबियो का मकसद यह दिखाना था कि अमेरिका की रणनीति में इंडो-पैसिफिक अब भी केंद्र में है, चाहे दुनिया में और भी कई संकट क्यों न चल रहे हों।

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