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विधानसभा चुनाव में लगातार जीत बीजेपी के लिए मरहम

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए को मिली कम सीटों के दर्द पर विधानसभा चुनाव में लगातार मिल रही जीत मरहम का काम कर रही है। राज्यसभा में लगातार उसकी संख्या बढ़ रही है। ऐसे में अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी को फायदा मिलता नजर आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र, बंगाल और बिहार जैसे बड़े राज्यों की विधानसभाओं पर अपने सहयोगियों के साथ उसका जबरदस्त दबदबा लोकसभा में हुए नुकसान की भरपाई करने में असरदार साबित होगा। यूपी के बाद ये तीनों राज्य राष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में बड़ी जगह रखते हैं। लोकसभा में 2024 में उसकी सीटों की संख्या 303 से घटकर 240 रह गई थी। संसद और विधानसभाओं के सभी चुने हुए सदस्य मिलकर निर्वाचक मंडल बनाते हैं।

संसद और विधानसभाओं का वोटिंग में बराबर हिस्सा होता है, लेकिन जहां हर सांसद के वोट का मूल्य एक जैसा होता है, वहीं एक विधायक के वोट का वजन उस विधानसभा द्वारा प्रतिनिधित्व की जाने वाली आबादी के आकार के आधार पर अलग-अलग होता है। 2022 में यूपी के एक विधायक के वोट का मूल्य 208 था, जो सिक्किम के एक विधायक के वोट के मूल्य से करीब 30 गुना ज्यादा था। अगले साल भी यह आंकड़ा लगभग वैसा ही रहने की संभावना है, क्योंकि जनगणना के आंकड़े स्थिर रहते हैं और विधानसभा की सदस्य संख्या भी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा का अस्तित्व भी एक अहम कारक होगा, हालांकि इसका असर मामूली ही होगा। बता दें लोकसभा में सीटों की संख्या में गिरावट के कारण निर्वाचक मंडल में बीजेपी के वोटों में 44,100 की कमी आई। 2022 में निर्वाचक मंडल की कुल सदस्य संख्या 10,86,431 थी। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को भले ही बहुमत न मिला हो लेकिन दो साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद वह अब काफी मजबूत स्थिति में है। राष्ट्रपति चुनावों में उत्तर प्रदेश की भूमिका सबसे अहम है, जहां विधायकों के वोटों का कुल भार 83,800 से ज्यादा है। लोकसभा चुनावों के बाद जब बहुमत के लिए 272 का आंकड़ा पार करने के लिए बीजेपी को टीडीपी और जेडीयू पर निर्भर रहना पड़ा तो विपक्ष ने तुरंत इन दोनों क्षेत्रीय पार्टियों को बीजेपी के अस्तित्व के लिए बैसाखी करार दिया।

इसके अलावा, 288 सदस्यों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में एनडीए की ताकत पिछले राष्ट्रपति चुनावों के समय के 150 से बढ़कर 237 तक पहुंच गई है और 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में यह 125 से बढ़कर 202 हो गई है। अब पश्चिम बंगाल में उसके पास 77 के मुकाबले 207 विधायक हैं। अगले साल जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों से पहले सबसे ज्यादा अहमियत यूपी की है, क्योंकि निर्वाचक मंडल में उसके वोटों का वजन 83,800 से भी ज्यादा है।

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