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नई दिल्ली। भारतीय नौसेना के इस अदृश्य योद्धा के अस्तित्व में आते ही न केवल पाकिस्तान, बल्कि चीन की भी नींद उड़ गई थी। भारत के खिलाफ हमेशा बुरी नजर रखने वाले इन दुश्मनों की सबसे बड़ी चिंता इस ‘ब्रह्मास्त्र’ की ताकत थी। दरअसल, हम भारतीय नौसेना के जंगी जहाज आईएनएस शिवालिक के बारे में बात कर रहे हैं। 2010 में उस दिन भी 29 अप्रैल की ही तारीख थी, जब आईएनएस शिवालिक ने मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के तट से पहली बार समुद्र से हुंकार भारी थी। यह हुंकार इतनी जबरदस्त थी कि इससे इस्लामाबाद से लेकर बीजिंग तक हिल गया था। दुश्मन की बेचौनी उस वक्त चरम पर पहुंच गई थी, जब उसे पता चला था कि भारत का यह ‘ब्रह्मास्त्र’ उसके रडार की आंखों में धूल झोंककर उसके घर में घुसकर शिकार करने की क्षमता रखता है।
आईएनएस शिवालिक को ‘अदृश्य योद्धा’ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसमें स्टील्थ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। पारंपरिक युद्धपोत समंदर में चलते समय रडार पर एक बड़े पर्वत की तरह दिखते हैं, लेकिन आईएनएएस शिवालिक के मामले में कहानी पूरी तरह से अलग है। आईएनएस शिवालक बॉडी को खास एंगल्स पर बनाया गया है। जब दुश्मन के रडार की किरणें इससे टकराती हैं, तो वे वापस जाने के बजाय बिखर जाती हैं। रडार स्क्रीन पर यह 142 मीटर लंबा युद्धपोत एक छोटी मछली पकड़ने वाली नाव जैसा नजर आता है।रिपोर्ट के मुताबिक दुश्मन की मिसाइलें अक्सर युद्धपोत की गर्मी का पीछा करती हैं। शिवालिक में ऐसी कूलिंग प्रणाली लगी है जो इसके इंजन से निकलने वाली गर्म हवा को ठंडा कर देती है, साथ ही, इसके इंजनों को रबर पैडिंग पर रखा गया है, ताकि पानी के अंदर मौजूद पनडुब्बियां इसका शोर न सुन सकें। जब तक दुश्मन को पता चलेगा कि समंदर में कोई शिकारी उसका शिकार करने के लिए मौजूद है, तब तक शिवालिक उसकी सीमा के अंदर घुसकर उसका काम तमाम कर चुका होगा। चीन हिंद महासागर में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए लगातार पनडुब्बियां और युद्धपोत भेजता रहा है। आईएनएस शिवालिक की एंटी-सबमरीन और एंटी-शिप हमेशा चीनी नौसेना के सामने एक मजबूत दीवार बनकर खड़ी रही हैं।
पाकिस्तान के पास जो अगोस्ता श्रेणी की सबमरीन हैं, वे भारत के पुराने युद्धपोतों के लिए खतरा थीं, लेकिन आईएनएस शिवालिक की बेहतरीन सोनार और ‘वरुणास्त्र’ टॉरपीडो उन सबमरीन को पलक झपकते गहरे पानी में दफन करने की ताकत रखते हैं। आईएनएस शिवालिक में लगी सुपरसोनिक मिसाइलें न केवल समंदर में दुश्मन के युद्धपोतों को जलसमाधी देने की ताकत रखती हैं, बल्कि दुश्मन के सैन्य ठिकानों को भी नेस्तनाबूद कर सकती हैं। आईएनएस शिवालिक से कोई भी मिसाइल लॉन्च की जा सकती है।
आईएनएस शिवालिक सिर्फ खुद को छिपाने में ही माहिर नहीं है, बल्कि वह दुश्मन को पूरी तरह से बबा्द करने की ताकत रखती है। इसकी मारक क्षमता इसे दुनिया के सबसे घातक फ्रिगेट्स की कैटेगरी में खड़ा करती है। आईएनएस शिवालिक से लॉन्च होने वाली ये मिसाइलें सुपरसोनिक स्पीड से दुश्मन के जहाज पर हमला कर सकती हैं। इनकी रफ्तार इतनी तेज है कि दुश्मन को पलटवार करने का मौका ही नहीं मिलेगा। अगर दुश्मन कोई हवाई हमला या मिसाइल दागता है, तो आईएसएफ शिवालिक का एयर डिफेंस सिस्टम उसे हवा में ही उसे राख करने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट के मुताबिक आईएनएस शिवालिक में 76एमएम सुपर रैपिड गन लगी है। यह गन प्रति मिनट कई राउंड गोले दागकर तटीय इलाकों में तबाही मचाने की क्षमता रखती है साथ ही इसके डेक पर दो घातक हेलीकॉप्टर तैनात रहते हैं, जो दूर से ही दुश्मन की लोकेशन ट्रैक कर उसे खत्म करने के लिए उड़ान भर सकते हैं। आईएनएस शिवालिक को अदृश्य योद्धा बनाने वाली इसकी स्टील्थ तकनीक केवल एक फीचर नहीं, बल्कि इसके पूरे स्ट्रक्चर का मूल आधार है। इस युद्धपोत के डिजाइन में ‘रडार क्रॉस-सेक्शन’ को कम करने के लिए खास एंग्युलर जियोमेट्री का इस्तेमाल किया गया है।
यह एंग्युलर जियोमेट्री दुश्मन के रडार से आने वाली तरंगों को सोख लेती है या उन्हें अलग दिशा में मोड़ देती है। इसके अलावा आईएनएस शिवालिक के ऊपर एक खास तरह का रडार एब्जॉर्बेंट मटेरियल पेंट किया गया है। इसके इंजनों से निकलने वाले धुएं और गर्मी को ‘इंफ्रारेड सप्रेशन सिस्टम’ के जरिए ठंडा किया जाता है, जिससे गर्मी का पीछा करने वाली मिसाइलें इसे पहचान नहीं पातीं हैं। यह तकनीक इसे समंदर में एक ऐसा शिकारी बनाती है जो खुद तो सब कुछ देख सकता है, लेकिन दुश्मन के लिए एक ‘भ्रम’ बना रहता है।
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