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भारत में क्रूड ऑयल की किल्लत

नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका की बीच दूसरे चरण की वार्ता ना होने से तेल बाजार एक बार फिर उछाल आया। एक उम्मीद जगी थी कि शायद जल्द ही होर्मुज खुल जाए। हालांकि अब इसका कोई रास्ता फिलहाल नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में ब्रेंट ऑइल की कीमतें 2.5 फीसदी की वृद्धि के साथ 107.97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक तेहरान की तरफ से ट्रंप के सामने एक नया प्रस्ताव रखा गया है। इसमें कहा गया है कि होर्मुज खोलने को लेकर पहले बात होनी चाहिए और परमाणु मुद्दे पर बात बाद में भी हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वैसे तो अमेरका और ईरान के बीच युद्धविराम चल रहा है लेकिन होर्मुज का रास्ता अब भी बंद है। एक तरफ अमेरिका ने नाकेबंदी कर रखी है। इसी वजह से ईरान भी होर्मुज को खोलने को तैयार नहीं है। इसके चलते उर्वरक, प्राकृतिक गैस, फ्यलू और कच्चे तेल की सप्लाई ठप हो गई है। जानकारों का कहना है कि अगर स्थितियां ऐसी ही बनी रहीं तो आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में और इजाफा होगा। वहीं पेट्रोल और डीजल की किल्लत बढ़ सकती है।

लाइव लॉन्ग वेल्थ के संस्थापक और शोध विश्लेषक ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, विशेषकर होर्मुज के आसपास की स्थिति और अमेरिका-ईरान वार्ता में गतिरोध से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। इससे कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ रहा है और ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए ऊंची तेल कीमतें सबसे अहम आर्थिक कारक हैं, क्योंकि इससे महंगाई, रुपए और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ता है।अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से यूपी में सड़कों के निर्माण के लिए डामर (बिटुमिन) का संकट गहरा गया है। इसका असर हमीरपुर जिले में लोक निर्माण विभाग की सड़क परियोजनाओं पर साफ दिखाई दे रहा है। कई सड़कें अधर में लटक गई हैं, जबकि कुछ स्थानों पर गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विभाग के अधीक्षण अभियंता ने बताया कि सड़क निर्माण में उपयोग होने वाला डामर क्रूड ऑयल से तैयार होता है और भारत में इसके लिए ईरान समेत अन्य देशों से कच्चे तेल का आयात किया जाता है। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव से इसकी आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि जब ठेकेदारों ने टेंडर डाले थे, उस समय डामर की कीमत करीब 42 हजार रुपए प्रति मीट्रिक टन थी, लेकिन अब जीएसटी समेत यह बढ़कर करीब एक लाख रुपए प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। डामर की कीमतों में इस भारी वृद्धि से ठेकेदारों में हड़कंप मचा है।

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