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सीसीटीवी निगरानी जितनी ज्यादा, खतरा उतना बड़ा?

देशभर में सीसीटीवी ऑडिट की मांग तेज 

नई दिल्ली। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच हालिया तनाव और कथित साइबर जासूसी घटनाओं ने दुनिया भर में निगरानी प्रणालियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली खुफिया एजेंसियों ने तेहरान के सीसीटीवी नेटवर्क को हैक कर संवेदनशील सूचनाओं का इस्तेमाल किया, जिससे सुरक्षा खामियों को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ गई है। इसी संदर्भ में भारत में भी सीसीटीवी निगरानी प्रणाली की सुरक्षा पर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय शहर दुनिया के सबसे अधिक निगरानी वाले शहरों में शामिल हैं, लेकिन उनके सुरक्षा ढांचे उतने मजबूत नहीं हैं। कई बड़े सीसीटीवी नेटवर्क पुराने हैं और उनमें साइबर सुरक्षा फीचर्स की भारी कमी है, जिससे हैकिंग का खतरा बढ़ जाता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुनिया भर में अब साइबर हमलों के जरिए निगरानी सिस्टम को रीयल टाइम में एक्सेस किया जा सकता है, जिससे पहले जो जांच हफ्तों में होती थी, वह अब मिनटों में संभव हो गई है। इससे न सिर्फ आम नागरिक बल्कि वीआईपी सुरक्षा भी खतरे में आ सकती है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। पहले जहां सीसीटीवी फुटेज की जांच लंबा समय लेती थी, वहीं अब एआई आधारित टूल्स से बड़े पैमाने पर डेटा तुरंत प्रोसेस किया जा सकता है। भारत में कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल बढ़ा है, खासकर पुलिसिंग और अपराध नियंत्रण में। कुछ राज्यों में चेहरे की पहचान तकनीक (फेशियल रिकग्निशन) का भी इस्तेमाल हो रहा है, जिससे किसी व्यक्ति को ट्रैक करना आसान हो जाता है, लेकिन यदि यह सिस्टम सुरक्षित न हो तो इसका दुरुपयोग भी संभव है। दिल्ली में हाल ही में चीनी पुर्जों वाले सीसीटीवी कैमरों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह कदम सुरक्षा दृष्टि से अहम माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या सिर्फ उपकरणों की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साइबर सुरक्षा है। इसी बीच एक और चिंता सामने आई है कि कुछ सरकारी संस्थानों के सीसीटीवी फीड बिना सुरक्षा के इंटरनेट पर उपलब्ध हैं, जिससे संवेदनशील डेटा तक किसी की भी पहुंच संभव हो सकती है। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपने पूरे सीसीटीवी नेटवर्क का पारदर्शी और व्यापक ऑडिट कराना चाहिए, ताकि कमजोरियों की पहचान कर उन्हें ठीक किया जा सके। उनका कहना है कि आधुनिक सुरक्षा सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल नेटवर्क और डेटा सुरक्षा पर भी निर्भर करती है। बढ़ती तकनीकी निर्भरता के बीच यह सवाल अहम हो गया है कि क्या भारत अपने विशाल निगरानी नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त तैयार है या नहीं।

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