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अब गुजरात भाजपा में अंतर्कलह

अहमदाबाद। गुजरात में सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान सोमवार को उस समय खुलकर सामने आ गई, जब नर्मदा जिले की भाजपा विधायक डॉ. दर्शना देशमुख एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान नाराज होकर मंच छोड़कर चली गईं। उन्होंने कार्यक्रम में अपने साथ कथित तौर पर हुए अपमान और प्रोटोकॉल की अनदेखी का आरोप लगाया। नाराज विधायक ने बाद में सांकेतिक उपवास शुरू कर दिया और इस्तीफा देने तक की चेतावनी दे डाली। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

यह पूरा मामला राजपीपला के अंबेडकर हॉल में आयोजित उस कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के दौरान दर्शना देशमुख ने आरोप लगाया कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने के बावजूद उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया गया और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में विधायक को मंच पर नाराजगी जाहिर करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में वह आयोजकों से सवाल करती नजर आती हैं कि क्या उन्हें कार्यक्रम में सम्मान देने के बजाय अपमानित करने के लिए बुलाया गया था। इसके बाद वह कार्यक्रम छोड़कर बाहर चली गईं।

शुरू किया सांकेतिक उपवास

मंच छोड़ने के बाद दर्शना देशमुख राजपीपला में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास पहुंचीं और सांकेतिक उपवास पर बैठ गईं। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान नहीं मिलेगा तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति है। विधायक की नाराजगी ने भाजपा संगठन और स्थानीय नेतृत्व के बीच समन्वय को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

आप ने भाजपा को घेरा

इस विवाद के बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के आदिवासी नेता चौतर वसावा ने दावा किया कि यह केवल एक विधायक का नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संगठन में आदिवासी नेताओं, सांसदों और विधायकों को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया जाता। वसावा ने कहा कि जिस प्रकार दर्शना देशमुख को सार्वजनिक रूप से अपमानित महसूस करना पड़ा और उन्हें धरने पर बैठना पड़ा, उससे आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भाजपा में उनका सम्मान सुरक्षित नहीं है तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देने पर विचार करना चाहिए।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा

घटना के बाद गुजरात की राजनीति में भाजपा के भीतर गुटबाजी और संगठनात्मक असंतोष को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विधायक की नाराजगी ने स्थानीय स्तर पर भाजपा के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।


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