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अमेरिका के पास होर्मुज में 20-30 युद्धपोत सैकड़ों ड्रोन तैनात करने की है क्षमता

वाशिंगटन। 13 जुलाई 2026 को सैन्य इतिहास में एक यादगार दिन बन गया। अमेरिका ने पहली बार अपने कॉरसेयर यूएसवी को हमले के लिए इस्तेमाल किया। इन ड्रोन बोट्स ने ईरान के बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डे पर घदीर क्लास पनडुब्बी को नष्ट कर दिया। इससे पहले जून में एक कॉरसेयर यूएसवी ने ओमान की खाड़ी में क्रैश हुए अपाचे हेलिकॉप्टर के क्रू को बचाया था। अमेरिका दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना रखता है। अमेरिकी नौसेना के पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर, 70$ परमाणु पनडुब्बियां, 90$ डेस्ट्रॉयर और फ्रिगेट्स हैं। फिफ्थ फ्लीट बहरीन में तैनात है। 2026 युद्ध में अमेरिका ने टॉक फोर्स 59 के तहत एआई और ड्रोन तकनीक को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सारोनिक कॉरसेयर यूएसवी जैसी ऑटोनॉमस बोट्स अब हमले, बचाव और गश्त के लिए तैयार हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के पास होर्मुज में लगातार 20-30 युद्धपोत और सैकड़ों ड्रोन तैनात करने की क्षमता है। ईरान की नौसेना दो हिस्सों में बंटी है- नियमित नौसेना और आईआरजीसी नेवी। आईआरजीसी एसिमेट्रिक वॉरफेयर में माहिर है। ईरान के पास 20-25 घदीर और फतेह क्लास छोटी पनडुब्बियां, सैकड़ों स्पीड बोट्स, माइन्स और क्रूज मिसाइलें हैं, लेकिन आधुनिक युद्धपोतों की कमी है। 2026 युद्ध में ईरान ने कई जहाजों पर हमले किए, लेकिन अमेरिकी हमलों में उसकी कई सुविधाएं नष्ट हो चुकी हैं। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज -आईआईएसएस के 2026 आंकड़ों के मुताबिक ईरान की नौसेना पहले से ही पुरानी है और युद्ध में और कमजोर हुई है। ईरान और हूती विद्रोहियों ने पहले सुसाइड यूएसवी का इस्तेमाल किया था। अब अमेरिका ने इसे एडवांस रूप में अपनाया है। यूक्रेन और रूस के युद्ध में भी यूएसवी ने रूसी बेड़े को नुकसान पहुंचाया। सारोनिक कॉरसेयर की सफलता पूरे यूएसवी उद्योग के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।

ईरान के पास अभी भी कुछ ताकत बची है- माइन्स, ड्रोन और स्पीड बोट स्वार्म हमले, लेकिन अमेरिका की एयर सुपीरियरिटी और ड्रोन तकनीक के आगे ईरान की पारंपरिक नौसेना काफी कमजोर है। रिपोर्ट के मुताबिक बड़े युद्ध में ईरान होर्मुज को कुछ दिनों के लिए बाधित कर सकता है, लेकिन लंबे समय तक नियंत्रण नहीं रख पाएगा। ट्रंप ने होर्मुज को गार्जियन ऑफ द स्ट्रेट कहकर अमेरिका का नियंत्रण घोषित किया। 20 फीसदी टोल लेने की बात कही। उन्होंने नौसैनिक ब्लॉकेड भी दोबारा लगाया। समुद्री युद्ध में ईरान की ताकत काफी कम हो चुकी है। अमेरिका नई ड्रोन तकनीक से आगे है। होर्मुज पर अमेरिका का प्रभावी नियंत्रण है, लेकिन पूर्ण शांति तभी आएगी जब दोनों पक्ष बातचीत करेंगे।

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