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ट्रंप के नए ऐलान से भारत के ऊर्जा बाजार में भूचाल की आशंका

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया ऐलान ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में नई हलचल मचा दी है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर 20 फीसदी शुल्क लगाने और ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी फिर से शुरू करने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे संवेदनशील समय में आया है, जब अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार चरम पर है, जिससे पश्चिम एशिया में अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है। इसका सबसे बड़ा असर उन देशों पर पड़ सकता है, जो खाड़ी देशों से तेल और गैस आयात करते हैं, और इनमें भारत सबसे प्रमुख देशों में से एक है।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में बयान देते हुए कहा कि अमेरिका अब होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहा है, इसलिए इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से 20 फीसदी टैक्स लिया जाएगा। उनके मुताबिक, यह रकम सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाले भारी-भरकम खर्च की भरपाई के लिए होगी। साथ ही उन्होंने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी को दोबारा लागू करने का भी ऐलान किया। ट्रंप के इस फैसले पर ईरान ने तत्काल और कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो टूक शब्दों में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का असली संरक्षक ईरान है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि अगर सुरक्षा के बदले शुल्क लेना ही है, तो 20 फीसदी बहुत ज्यादा है। ईरान के सैन्य नेतृत्व ने इससे भी आगे बढ़कर चेतावनी दी कि होर्मुज के संचालन में किसी भी अमेरिकी दखल को उसकी संप्रभुता पर सीधा हमला माना जाएगा और उसका माकूल जवाब दिया जाएगा।

ट्रंप के इस एकतरफा ऐलान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन का स्पष्ट तौर पर कहना है कि किसी अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर एकतरफा और अनिवार्य शुल्क लगाने का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन हो सकता है। भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा वह खाड़ी देशों से आयात करता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर जैसे प्रमुख उत्पादक देशों से आने वाला ज्यादातर कच्चा तेल और एलएनजी होर्मुज स्ट्रेट से होकर ही भारत पहुंचता है। अगर ट्रंप का यह 20 फीसदी शुल्क लागू होता है, तो भारतीय कंपनियों के लिए तेल और गैस खरीदना स्वाभाविक रूप से महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों, माल ढुलाई के किराये और रोजमर्रा की वस्तुओं की महंगाई पर पड़ सकता है, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

ट्रंप के इस बयान से कुछ ही घंटे पहले संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिणी हिस्से में उसके दो तेल टैंकरों पर ईरानी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। इस भीषण हमले में दुर्भाग्यवश एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि छह भारतीयों समेत कुल आठ लोग घायल हुए, जिनमें से चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविक किस तरह बढ़ते संघर्ष और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अत्यधिक जोखिम उठा रहे हैं। 


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