Search

Shopping cart

Saved articles

You have not yet added any article to your bookmarks!

Browse articles

अमेरिका ने समुद्र में उतारे मिसाइल डेस्ट्रॉयर

वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी नौसेना को हाई अलर्ट पर रखते हुए युद्धपोतों की तैनाती शुरू कर दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर यूएसएस डेलबर्ट डी ब्लैक सहित कई जहाजों पर भारी मात्रा में ईंधन, रसद, आधुनिक हथियार और अन्य जरूरी सैन्य सामान लोड किया जा रहा है। यह तैयारी इस ओर इशारा करती है कि अमेरिकी नौसेना क्षेत्र में लंबे समय तक चलने वाले किसी भी सैन्य ऑपरेशन के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है।

इस बीच सैन्य हलकों से आ रही खबरें और भी चौंकाने वाली हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के विभिन्न विकल्पों से अवगत कराया है। व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान एडमिरल ब्रैड कूपर ने राष्ट्रपति के समक्ष एक छोटे लेकिन बेहद शक्तिशाली हमले का खाका पेश किया है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य ईरान की बची हुई सैन्य क्षमता, उसके शीर्ष नेतृत्व और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना है। चर्चा यह भी है कि इस संभावित हमले में अमेरिका अपने सबसे घातक और उन्नत हथियार डार्क ईगल हाइपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल कर सकता है।

अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान सीजफायर की आड़ में अपनी सैन्य शक्ति को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सरकार उन मिसाइलों और ड्रोन प्रणालियों को मलबे या भूमिगत ठिकानों से बाहर निकाल रही है, जो पिछले अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों के दौरान सुरक्षित बच गए थे। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यदि सैन्य ऑपरेशन दोबारा शुरू होता है, तो ईरान अपनी बढ़ी हुई ड्रोन और मिसाइल क्षमता का उपयोग कर मध्य पूर्व के अन्य देशों पर जवाबी हमला कर सकता है। तनाव की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गुरुवार रात ईरान की राजधानी तेहरान में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय होने की खबरें आईं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, ये सिस्टम किसी संदिग्ध ड्रोन या टोही विमान को मार गिराने के लिए सक्रिय हुए थे। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह कोई वास्तविक खतरा था या केवल एक युद्धाभ्यास। फिलहाल, वाशिंगटन से लेकर तेहरान तक सैन्य हलचलें तेज हैं और पूरी दुनिया की नजरें राष्ट्रपति ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हैं।


Comments (0)

Leave a Comment