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अंधे मरीजों की आंखों में लौटी आंशिक रोशनी

नई दिल्ली।  विज्ञान की दुनिया में दृष्टिहीनता के इलाज को लेकर नई उम्मीद जगी है। वैज्ञानिकों ने जीन थेरेपी और विशेष चश्मे की मदद से कुछ ऐसे मरीजों में आंशिक दृष्टि बहाल करने में सफलता हासिल की है, जो रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा नामक आनुवंशिक बीमारी के कारण लगभग पूरी तरह दृष्टिहीन हो चुके थे। इस बीमारी में आंखों की रोशनी महसूस करने वाली कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट हो जाती हैं।

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, इस प्रायोगिक उपचार में 10 मरीजों की एक आंख में प्रकाश के प्रति संवेदनशील प्रोटीन बनाने वाले जीन पहुंचाए गए। इसके बाद मरीजों को विशेष चश्मे दिए गए, जिनमें लगे कैमरे सामने मौजूद वस्तुओं की तस्वीर लेकर उन्हें प्रकाश के संकेतों में बदलते हैं। ये संकेत आंख की संशोधित कोशिकाओं को सक्रिय करते हैं, जिससे दृश्य संबंधी जानकारी मस्तिष्क तक पहुंच सकती है। अध्ययन में सात मरीजों की प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता में सुधार हुआ, जबकि छह मरीजों में चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया गया। आठ मरीजों ने व्यवहार संबंधी परीक्षण पूरे किए, जिनमें से चार ने वस्तुओं को पहचानने या उनकी स्थिति का पता लगाने जैसे कार्यों में सुधार दिखाया।

हालांकि, इस उपचार से सामान्य दृष्टि वापस नहीं आई। मरीज अभी अक्षर पढ़ने या चेहरों को पहचानने में सक्षम नहीं हुए। उपचार के लिए विशेष चश्मे का इस्तेमाल और प्रशिक्षण भी जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह शुरुआती अध्ययन दृष्टि बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता और दीर्घकालिक सुरक्षा की पुष्टि के लिए बड़े स्तर पर और शोध की आवश्यकता होगी।

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