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इकलौते विधायक के बाद भी चुनौती बन गए प्रशांत किशोर

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए पद संभालने के छह महीने के भीतर ही नई राजनीतिक चुनौती सामने आ गई है। यह चुनौती न तो प्रमुख विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से है और न ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से। बल्कि, जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) अपने एक विधायक के दम पर मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। बीजेपी के गढ़ बांकीपुर में मिली जीत ने प्रशांत किशोर को सम्राट चौधरी के नेतृत्व पर सवाल उठाने का एक नया मंच दे दिया है। उन्हे पद से हटाने की मांग भी कर दी।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली जीत ने प्रशांत किशोर की चुनौती को और गंभीर बना दिया। यह सीट लगभग तीन दशकों से बीजेपी का गढ़ मानी जाती थी। उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 वोटों के अंतर से हराया। यह सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी के लिए यह पहला बड़ा चुनावी परीक्षण था, और हार ने विपक्ष को उनके जमीनी राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाने का मौका दिया। जीत के बाद प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री से बिहार के लिए एक काबिल और चरित्रवान मुख्यमंत्री चुनने की अपील की।

प्रशांत किशोर की चुनौती अब केवल व्यक्तिगत हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बिहार में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के भीतर मतभेदों का भी फायदा उठा रहे हैं। गठबंधन में बीजेपी, जेडीयू, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। गठबंधन के भीतर असहमति का ताजा उदाहरण बिहार विधान परिषद चुनावों में देखने को मिला है। आगामी 23 अक्टूबर को होने वाले इन चुनावों में जन सुराज पार्टी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशों ने एनडीए के सहयोगी दलों के बीच तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह का खुलकर समर्थन किया है। अनंत सिंह ने इसे नीरज कुमार के साथ अपनी पुरानी प्रतिद्वंद्विता का परिणाम बताया है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध नीरज कुमार से है, न कि नीतीश कुमार या जेडीयू से।

विवाद सुलझाने के लिए एनडीए विधायकों की बैठक

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विवाद सुलझाने के लिए एनडीए विधायकों की बैठक बुलाई और आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार न करने की चेतावनी दी, लेकिन मतभेद दूर नहीं हो सके। प्रशांत किशोर ने इस विवाद को और हवा देते हुए नीतीश कुमार को सार्वजनिक रूप से मतदाताओं से नीरज कुमार के समर्थन की अपील करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार ऐसा करते हैं, तो जन सुराज अपने उम्मीदवार को वापस ले लेगी। एनडीए की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं; उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा में भी नेतृत्व को लेकर बगावत सामने आई है, जहां पार्टी के चार में से तीन विधायक खुले तौर पर नेतृत्व को चुनौती दे रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने सम्राट चौधरी के सामने गठबंधन को एकजुट रखने की चुनौती बढ़ा दी है।


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