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भाजपा की नई टीम में दमखम

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पद संभालने के करीब सात माह बाद अपनी नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर संगठन में व्यापक बदलाव का संकेत दिया है। नई टीम में अनुभव और युवा ऊर्जा के बीच संतुलन बनाने के साथ सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश साफ दिखाई देती है। 65 नेताओं को अलग-अलग संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आठ राष्ट्रीय महासचिव और 16 राष्ट्रीय सचिव शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न मोर्चों और संगठनात्मक प्रकोष्ठों में भी नई नियुक्तियां की गई हैं।

नवीन की टीम को केवल संगठनात्मक फेरबदल के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसे आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। खासतौर पर 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को भाजपा ने अपनी रणनीति के केंद्र में रखा है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश से जुड़े कई अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। नई टीम की सबसे चर्चित नियुक्तियों में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का राष्ट्रीय महासचिव बनना है। 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद स्मृति ईरानी की यह संगठनात्मक वापसी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भाजपा ने उन्हें ऐसे समय में राष्ट्रीय संगठन की जिम्मेदारी दी है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा बनने जा रहा है। स्मृति ईरानी की आक्रामक राजनीतिक शैली, संगठनात्मक अनुभव और महिला मतदाताओं के बीच संवाद क्षमता को पार्टी चुनावी रणनीति में इस्तेमाल करना चाहती है।

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के जवाब में भाजपा ने अपनी सामाजिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश की है। अमरपाल मौर्य को पिछड़ा वर्ग मोर्चा की जिम्मेदारी और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर पार्टी ने सामाजिक प्रतिनिधित्व का संदेश दिया है। स्मृति ईरानी के साथ उत्तर प्रदेश के हरीश द्विवेदी को भी राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। हरीश द्विवेदी का संगठन और चुनावी प्रबंधन का अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी माना जाता है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संवाद बढ़ाने की चुनौती होगी। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन में उत्तर प्रदेश के नेताओं की मौजूदगी पार्टी की रणनीति को राज्य की जमीनी राजनीति से जोड़ने में मदद कर सकती है।

नई टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वसुंधरा राजे का राजनीतिक अनुभव और राजस्थान में उनका प्रभाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। राष्ट्रीय संगठन में उन्हें महत्वपूर्ण स्थान देकर पार्टी ने एक ओर उनके अनुभव का सम्मान किया है, वहीं दूसरी ओर राजस्थान के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने का प्रयास भी किया है। वसुंधरा राजे की भूमिका केवल राजस्थान तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि पार्टी के व्यापक संगठनात्मक संतुलन में भी उनका उपयोग हो सकता है। राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा राजे का लंबा अनुभव उन्हें भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में अलग स्थान देता है। राजपूत, जाट और अन्य पारंपरिक भाजपा समर्थक सामाजिक समूहों के बीच उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता को पार्टी के लिए उपयोगी माना जाता है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में उनकी मौजूदगी भाजपा के पारंपरिक मतदाता आधार को एकजुट रखने और वरिष्ठ नेतृत्व तथा संगठन के बीच समन्वय कायम करने में भूमिका निभा सकती है। आगामी चुनावों के दौरान पार्टी को जहां नए सामाजिक समूहों तक पहुंच बनानी है, वहीं अपने परंपरागत समर्थकों को भी साथ बनाए रखना है। वसुंधरा राजे की नियुक्ति इसी दोहरी रणनीति का हिस्सा दिखाई देती है।

नई टीम में राम माधव की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में वापसी भी खास चर्चा में है। संगठन और वैचारिक मामलों में लंबे अनुभव वाले राम माधव की वापसी से भाजपा ने अनुभवी नेतृत्व को फिर से राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय किया है। इसी तरह त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब, राजस्थान के सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कई नेताओं के पास चुनावी प्रबंधन और संगठन विस्तार का अनुभव है।

बीएल संतोष राष्ट्रीय संगठन महामंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। शिवप्रकाश और अन्य संगठनात्मक पदाधिकारियों को भी महत्वपूर्ण दायित्व देकर पार्टी ने संगठन की निरंतरता बनाए रखी है। इसका अर्थ यह है कि भाजपा ने पूरी तरह पुराने ढांचे को बदलने के बजाय अनुभवी संगठनकर्ताओं के साथ नए चेहरों को जोड़कर आगे बढ़ने का रास्ता चुना है।नई टीम में महिला प्रतिनिधित्व को भी महत्व दिया गया है। 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में छह महिलाएं हैं और कुल मिलाकर 12 महिला पदाधिकारियों को राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिली है। स्मृति ईरानी का राष्ट्रीय महासचिव बनना इस लिहाज से विशेष महत्व रखता है। भाजपा लंबे समय से महिला मतदाताओं को अपने राजनीतिक आधार का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती रही है। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन में महिलाओं को प्रमुख जिम्मेदारियां देकर पार्टी महिला नेतृत्व को मजबूत करने का संदेश दे रही है।

सामाजिक प्रतिनिधित्व के स्तर पर भी नई टीम में विविधता दिखाई देती है। टीम में वंचित समुदायों, आदिवासी और अनुसूचित जाति वर्ग के नेताओं के साथ अल्पसंख्यक समुदायों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। एक सिख, ईसाई, मुस्लिम, जैन और पारसी समुदाय से जुड़े नेताओं को जगह देकर भाजपा ने अपने संगठन को सामाजिक रूप से अधिक व्यापक स्वरूप देने का प्रयास किया है। पूर्वाेत्तर राज्यों को भी संगठन में प्रतिनिधित्व मिला है। बिप्लब कुमार देब को राष्ट्रीय महासचिव, फांगनोन कोन्याक और मृगांका देन बर्मन को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी मिलना पूर्वाेत्तर पर पार्टी के बढ़ते फोकस को दर्शाता है। गुजरात से युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में डॉ. हेमांग जोशी की नियुक्ति भी संगठन में युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने का संकेत है। कांग्रेस से भाजपा में आए रोहन गुप्ता और जगदीश पटेल को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। पंजाब में तरुण चुघ को राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी और मनप्रीत सिंह बादल को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है। आम आदमी पार्टी से भाजपा में आए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक को भी राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।

संगठन के संचार तंत्र में किया गया बदलाव भी महत्वपूर्ण है। लंबे समय से भाजपा के सोशल मीडिया और आईटी तंत्र से जुड़े अमित मालवीय की जगह प्रो. दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया प्रभारी बनाया गया है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब चुनावी राजनीति में डिजिटल माध्यमों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। सोशल मीडिया अब केवल प्रचार का माध्यम नहीं रहा, बल्कि मतदाताओं तक सीधे संवाद, लाभार्थियों से संपर्क और विपक्ष के प्रचार का जवाब देने का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। ऐसे में पार्टी सोशल मीडिया रणनीति को नए तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी में दिखाई देती है। मीडिया की जिम्मेदारी अनिल बलूनी के पास बरकरार रखी गई है। वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि पार्टी ने कुछ महत्वपूर्ण पदों पर निरंतरता को प्राथमिकता दी है। नई टीम की औसत उम्र करीब 50 वर्ष बताई गई है। इसमें 40 वर्ष से कम उम्र के छह नेता हैं, जबकि 40 से 49 वर्ष आयु वर्ग के 15, 50 से 59 वर्ष के 21 और 60 वर्ष से अधिक उम्र के 23 नेता शामिल हैं। इससे साफ है कि भाजपा ने पूरी तरह युवा चेहरों पर निर्भर होने के बजाय अनुभव और नई पीढ़ी के बीच संतुलन साधा है।

नई राष्ट्रीय टीम में 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। उत्तर प्रदेश को सर्वाधिक महत्व मिला है, जबकि दक्षिण भारत और पूर्वाेत्तर राज्यों पर भी संगठनात्मक ध्यान बढ़ाया गया है। इसका सीधा संबंध भाजपा के उस लक्ष्य से है, जिसमें वह उन राज्यों में अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक उपस्थिति मजबूत करना चाहती है जहां अभी विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं हैं। आने वाले समय में इस टीम की सबसे बड़ी परीक्षा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होगी। उत्तर प्रदेश लोकसभा की सबसे अधिक सीटों वाला राज्य है और 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा तथा विपक्ष दोनों के लिए निर्णायक माना जा रहा है। स्मृति ईरानी जैसे आक्रामक और चर्चित चेहरे को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर पार्टी ने चुनावी मैदान में अपनी रणनीति को धार देने का संकेत दिया है। वहीं वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर वरिष्ठ नेतृत्व के अनुभव और सामाजिक प्रभाव का उपयोग करने का रास्ता खुला रखा है।

कुल मिलाकर नितिन नवीन की नई टीम भाजपा के संगठनात्मक पुनर्गठन से कहीं आगे की तस्वीर पेश करती है। इसमें अनुभव, युवा नेतृत्व, महिला प्रतिनिधित्व, सामाजिक विविधता और क्षेत्रीय संतुलन को एक साथ साधने की कोशिश की गई है। स्मृति ईरानी की वापसी और वसुंधरा राजे को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलना इस टीम के सबसे बड़े राजनीतिक संकेत हैं। अब देखना होगा कि संगठन में किए गए ये बदलाव चुनावी मैदान में कितनी प्रभावी रणनीति में बदलते हैं और 2027 के विधानसभा चुनावों में भाजपा अपने नए संगठनात्मक ढांचे से कितना राजनीतिक लाभ हासिल कर पाती है।


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