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भारत में भी खतरा बढ़ा

जल संकट गहराया

नई दिल्ली । दक्षिण एशिया में लगातार बढ़ती गर्मी और तेजी से घटते जल संसाधन गंभीर पर्यावरणीय और सामाजिक संकट की ओर इशारा कर रहे हैं। अप्रैल के अंत तक भारत और पाकिस्तान में रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज हुआ हैं, जिससे हीटवेव की स्थिति और अधिक भयावह हो गई। इस भीषण गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई क्षेत्रों में पानी की मांग तेजी से बढ़ी है, जबकि उपलब्धता लगातार कम हो रही है।

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जल संकट अब केवल किसी एक देश या क्षेत्र की समस्या नहीं रहा है, बल्कि यह एक वैश्विक चुनौती बन चुका है। दुनिया के कई देशों में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता लगातार घट रही है, जो भविष्य के लिए गंभीर संकेत है। इसी कड़ी में पाकिस्तान उन शीर्ष 10 देशों में शामिल हो गया है, जहां प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता बेहद कम स्तर पर पहुंच चुकी है। वहां जल संकट के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जैसे अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि, कमजोर जल प्रबंधन प्रणाली और जलवायु परिवर्तन का व्यापक प्रभाव है। पाकिस्तान की स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि वहां की अधिकांश जल आपूर्ति सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। वर्षा के अनियमित पैटर्न और बर्फबारी में कमी ने संकट को बढ़ा दिया है।

इसके अलावा कृषि और घरेलू उपयोग में पानी की अत्यधिक खपत भी स्थिति को बिगाड़ रही है। वहीं भारत में भी स्थिति धीरे-धीरे चिंताजनक होती जा रही है। हालांकि भारत अभी वैश्विक टॉप 10 जल संकटग्रस्त देशों में शामिल नहीं है, लेकिन यहां भी प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता में लगातार गिरावट दर्ज हुई है। बढ़ती जनसंख्या, तेज शहरीकरण, भूजल का अत्यधिक दोहन और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। देश के कई राज्यों में भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा चुका है। विशेष रूप से उत्तर भारत और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। कई गांवों और शहरों में पानी की कमी रोजमर्रा की समस्या बन चुकी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह संकट और भी गहरा सकता है।

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