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भारत ने राष्ट्राध्यक्ष की तरह रखा-साजिब वाजेद

नई दिल्ल। बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश छोड़ने के दो वर्ष पूरे होने पर वर्चुअल माध्यम से मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वह हर हाल में अपने देश लौटेंगी। बातचीत के दौरान वह 1975 में अपने परिवार के सदस्यों की हत्या को याद कर भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि तमाम चुनौतियों और खतरों के बावजूद उनका लक्ष्य बांग्लादेश लौटकर देश को फिर से लोकतंत्र, विकास और धर्मनिरपेक्षता की राह पर लाना है। हालांकि उन्होंने वापसी की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई, लेकिन पहले की तरह इस बार भी दिसंबर में लौटने की इच्छा दोहराई।

इस दौरान उनके बेटे साजिब वाजेद जॉय ने भारत सरकार का आभार जताते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान शेख हसीना के साथ एक राष्ट्राध्यक्ष जैसा सम्मानजनक व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि भारत ने कठिन समय में एक मित्र देश की भूमिका निभाई और उन्हें सुरक्षा, सम्मान तथा आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराईं। हसीना ने कहा कि आज का बांग्लादेश वैसा नहीं रह गया है जैसा उन्होंने अपने शासनकाल में बनाने की कोशिश की थी। उनके अनुसार देश में अल्पसंख्यकों, न्यायपालिका से जुड़े लोगों, सांस्कृतिक हस्तियों और आम नागरिकों तक को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुक्ति संग्राम के समर्थकों पर लगातार हमले हो रहे हैं और देश की मौजूदा व्यवस्था लोकतांत्रिक मूल्यों से दूर होती जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उग्रवादी तत्वों को रिहा किए जाने से हालात और अधिक चिंताजनक हो गए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि बांग्लादेश के लोगों को आज सबसे अधिक संवैधानिक और राजनीतिक स्वतंत्रता की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव होने के बावजूद हिंसा और हत्याओं का दौर थमा नहीं है। उनके अनुसार मुक्ति संग्राम से जुड़े प्रतीकों और मूल्यों को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया गया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की पहचान और गौरव को फिर से स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

शेख हसीना ने वर्तमान सरकार पर आर्थिक मोर्चे पर भी सवाल उठाए। उनका दावा था कि देश की औद्योगिक स्थिति लगातार कमजोर हुई है, कई कारखाने बंद हो चुके हैं और अनेक उद्योगपति देश छोड़ चुके हैं या छिपकर रहने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार खर्च चलाने के लिए हर महीने केंद्रीय बैंक से भारी कर्ज ले रही है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। गौरतलब है कि अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के हिंसक होने के बाद शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव हुए और सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार का गठन हुआ। तब से दोनों देशों के संबंधों पर भी इस घटनाक्रम का असर देखा जा रहा है।

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