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पाकिस्तान ने युद्ध रोकने लगाई थी गुहार

नई दिल्ली। भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि 10 मई 2025 की सुबह जब घबराए हुए पाकिस्तान ने डीजीएमओ हॉटलाइन के जरिए भारत से युद्धविराम की गुहार लगाई, तो भारत ने उसे तुरंत स्वीकार करने के बजाय जानबूझकर दोपहर तक इंतज़ार कराया। पूर्व सीडीएस के मुताबिक ऐसा इसलिए किया क्योंकि भारत के नियोजित सैन्य हमलों में से आधे हमले अभी होने बाकी थे और भारत अपनी जीत को निर्णायक बनाना चाहता था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जनरल चौहान ने बताया कि 9 मई की रात से 10 मई की दोपहर तक भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों में स्थित 11 प्रमुख सैन्य ठिकानों और एयरबेस पर मिसाइल और हवाई हमले किए थे। इन हमलों में रावलपिंडी का नूर खान, रहीम यार खान और भोलारी जैसे प्रमुख पाकिस्तानी एयरबेस तबाह हो गए। भारत ने उनके हैंगर, रडार सिस्टम, एयरस्ट्रिप और कई लड़ाकू विमानों को भारी नुकसान पहुंचाया, जिनकी मरम्मत का काम आज भी जारी है। चौहान ने खुलासा किया कि उनके लिए सबसे बड़ा आश्चर्य तब हुआ जब पाकिस्तान ने बातचीत के लिए 10 मई को भारत को फ़ोन किया। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए था क्योंकि 9 मई को पाकिस्तानी पक्ष से जिस तरह की बातें सामने आ रही थीं, उनमें कहा जा रहा था कि वे 48 घंटों में भारत को सबक सिखा देंगे। हालांकि, 9 मई की रात से 10 मई की दोपहर तक भारत ने पाकिस्तान के 11 सैन्य ठिकानों और एयरबेस पर हमलों की झड़ी लगा दी। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इसका मकसद साफ संदेश देना था कि पाकिस्तान में कोई भी सैन्य ठिकाना सशस्त्र बलों की पहुंच से बाहर नहीं है।

उन्होंने कहा कि करीब आठ घंटों के अंदर पाकिस्तान फ़ोन उठा लिया। हमने अपनी योजनाओं का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं किया था। जनरल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान अच्छी तरह जानता था कि अगर लड़ाई जारी रही, तो वे तेज़ी से हारेंगे। उन्होंने कहा कि हमने सुबह 9रू30 बजे युद्धविराम स्वीकार क्यों नहीं किया और दोपहर तक कार्रवाई जारी रखी, इसकी वजह यह थी कि हम चाहते थे कि जीत और ज़्यादा निर्णायक हो। भारत ने पिछले साल 7 मई को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें 25 पर्यटक मारे गए थे। हमलों के पहले दौर में, भारत ने पाकिस्तान के अंदर मौजूद जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों से जुड़े नौ आतंकी कैंपों को नष्ट कर दिया।

इसके जवाब में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान के सीमावर्ती कस्बों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइलें दागीं। हालांकि उनमें से ज़्यादातर को नाकाम कर दिया गया या बीच में ही रोक दिया गया। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर हमला करने का फ़ैसला किया। चौहान ने कहा कि दिल्ली की ताकत उसके सैन्य कमांडरों की क्षमता में थी, जिससे वे अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में भारतीय और पाकिस्तानी हमलों के असर का बहुत तेज़ी से आकलन कर सकते थे। जनरल चौहान ने कहा कि युद्ध के मैदान और अपनी वास्तविक क्षमताओं की साफ समझ होना अहम साबित हुआ। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद भी उसी तरह पाकिस्तान के अंदर गहरे हमले करना चाहता था, जैसे दिल्ली ने सीमा पार किए बिना किए थे। तब तक भारत ने पाकिस्तान के कई रडार नष्ट कर दिए थे। पूर्व सीडीएस ने कहा कि पाकिस्तान को लगा कि अगर वे तेज़ी से और अंदर तक जाकर ऑपरेशन कर सकें, तो वे काफ़ी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

हालांकि, इससे पहले कि वे कुछ कर पाते, भारत ने उनके एयरफ़ील्ड पर हमले शुरू कर दिए। अहम ठिकानों पर एयरस्ट्रिप के क्षतिग्रस्त होने के कारण, पाकिस्तान अब और उड़ानें नहीं भर पा रहा था। चौहान ने कहा कि पाकिस्तान ने 10 मई की सुबह करीब 9.30 बजे इसलिए फ़ोन किया क्योंकि भारत की हवाई ताकत का असर दिख रहा था। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा कि अब बातचीत करना ही बेहतर है। वरना, मामला और बिगड़ सकता था। भारतीय सेना संघर्ष को खत्म करने से पहले एक स्थायी प्रभाव छोड़ने के लिए दृढ़ थी। निर्णायक नतीजा सुनिश्चित करने के लिए युद्धविराम पर सहमत होने से पहले सुबह 10 बजे और फिर दोपहर 1 बजे हमलों का एक नया दौर शुरू किया गया। जनरल चौहान ने कहा कि भारत ने हमलों का तीसरा दौर जारी रखा। इसे निर्णायक होना ही था।

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