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दाऊद का राजदार मुन्ना झिंगड़ा रच रहा था भारत के खिलाफ बड़ी साजिश

नई दिल्ली। खूंखार अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का बेहद करीबी और बड़ा राजदार मुन्ना झिंगड़ा एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की चर्चाओं में है। हाल ही में भारत के प्रमुख शहरों में हमले की फिराक में बैठे आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद मुन्ना झिंगड़ा का नाम सामने आया है। वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से कराची में बैठकर भारत के परमाणु प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और पावर प्लांट्स को निशाना बनाने की खतरनाक साजिशें रच रहा था। यह वही कुख्यात अपराधी है, जिसकी कस्टडी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच थाईलैंड की अदालत में एक लंबी कानूनी जंग चली थी।

मुन्ना झिंगड़ा का असली नाम सैयद मुदस्सुर हुसैन है और वह मूल रूप से मुंबई के जोगेश्वरी इलाके का रहने वाला है। वह दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील का सबसे भरोसेमंद शूटर माना जाता था। साल 2000 में दाऊद ने अपने सबसे बड़े दुश्मन छोटा राजन को खत्म करने का जिम्मा मुन्ना झिंगड़ा को सौंपा था। झिंगड़ा ने बैंकॉक में छोटा राजन के ठिकाने पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिसमें छोटा राजन तो बच निकला लेकिन उसका साथी रोहित वर्मा मारा गया। इस सनसनीखेज हमले के बाद थाईलैंड पुलिस ने मुन्ना झिंगड़ा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। झिंगड़ा की गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार ने थाईलैंड की अदालत में उसे भारत प्रत्यर्पित करने की मांग की। भारतीय एजेंसियों ने अदालत में पुख्ता सबूत पेश करते हुए बताया कि वह एक भारतीय नागरिक है और उस पर भारत में करीब 70 आपराधिक मामले दर्ज हैं। भारत ने उसके दावों को मजबूत करने के लिए उसके स्कूल सर्टिफिकेट और यहां तक कि भारत में रह रहे उसके माता-पिता का डीएनए टेस्ट भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। इन अकाट्य और वैज्ञानिक सबूतों के दम पर निचली अदालत में भारत की जीत हुई थी। इस फैसले से पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी पूरी तरह खौफ में आ गए थे। उन्हें डर था कि यदि झिंगड़ा भारत के हवाले कर दिया गया, तो वह दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तानी तंत्र के गठजोड़ के सारे गहरे राज उगल देगा। इस खुलासे से बचने के लिए पाकिस्तान ने फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया और दावा किया कि वह पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद सलीम है। दाऊद ने पहले ही मोहम्मद सलीम के नाम से उसका एक फर्जी पाकिस्तानी पासपोर्ट तैयार करवा रखा था।

थाईलैंड की ऊपरी अदालत में यह कानूनी विवाद कई सालों तक खिंचता रहा। अंततः, कूटनीतिक दबाव और तकनीकी आधारों पर थाईलैंड की अदालत ने पाकिस्तान के पासपोर्ट को सही मान लिया और भारत के वैज्ञानिक व व्यावहारिक सबूतों को नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद पाकिस्तानी अधिकारी उसे बैंकॉक से सीधे कराची ले गए। वर्तमान में, मुन्ना झिंगड़ा अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर पाकिस्तान से भारत के खिलाफ आतंकी साजिशें रचने में सक्रिय है, जिसे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने विफल कर दिया है।


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