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गुरुद्वारे से निकलते वक्त निहंगों ने बरसाए पत्थर

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग स्थित नगरासू गुरुद्वारे में चार दिनों से चला आ रहा गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया, जब पंजाब से आए एक शिष्टमंडल के साथ बातचीत के बाद पाँच निहंग सिख मंगलवार दोपहर पंजाब के लिए रवाना हो गए। हालांकि, उनके चले जाने के बाद भी स्थानीय लोगों में आक्रोश और तनाव बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निहंगों ने गुरुद्वारे से निकलते समय पुलिस के सामने पत्थर बरसाए, नाचते हुए और जयकारे लगाते हुए बाहर निकले, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह घटनाक्रम स्थानीय लोगों में भय और असंतोष पैदा कर गया है, जिन्होंने अब पुलिस प्रशासन के खिलाफ तहरीर सौंपने का निर्णय लिया है।

चार दिनों तक गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर कब्जे जैसी स्थिति बनी रही, जिससे नगरासू क्षेत्र में तनाव का माहौल रहा। इस दौरान पुलिस, आईटीबीपी और अन्य सुरक्षा बल तैनात रहे। गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से भी परिसर में तोड़फोड़ और अव्यवस्था के गंभीर आरोप लगाए गए थे। मंगलवार सुबह से गुरुद्वारे में सरगर्मी बनी हुई थी। लगभग तीन घंटे तक चली वार्ता के बाद सहमति बनी, जिसमें सतज्ञानी हरनाम सिंह खालसा भिंडरावाले और जत्थेदार बाबा अजीत सिंह जैसे प्रमुख व्यक्तित्व शामिल थे। जत्थेदार बाबा अजीत सिंह ने शांति की अपील करते हुए कहा कि उत्तराखंड के लोग उनके भाई हैं और निहंगों में कर्णप्रयाग की घटना को लेकर आक्रोश था। उन्होंने गुरुद्वारे पर कब्जे की बात से इनकार करते हुए कहा कि निहंग अपने धार्मिक स्थल पर ही रुके थे और पुलिस के भय से छत पर चढ़ गए थे। उन्होंने कानून को सर्वाेच्च बताते हुए कहा कि कर्णप्रयाग मामले में प्रशासन अपना कार्य कर रहा है।

स्थानीय लोगों और नेताओं ने इस पूरे प्रकरण पर प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत ने पूछा कि यदि पर्याप्त सुरक्षा बल मौजूद थे तो मामले का समाधान पहले ही क्यों नहीं किया गया। युवा नेता ने इसे सरकार और प्रशासन की विफलता बताते हुए कहा कि शांत माहौल को खराब करने का प्रयास किया गया और सरकारी मशीनरी के साथ-साथ स्थानीय लोगों को चार दिनों तक परेशानी झेलनी पड़ी, किंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई। नगर पालिका अध्यक्ष संतोष रावत और जिपंस संपंन नेगी ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह व्यक्त किया। लोगों का कहना है कि तनाव, तोड़फोड़ और भय का माहौल बने रहने के बावजूद संबंधित लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न होना चिंताजनक है। स्थानीय निवासी गौरव चौधरी ने बताया कि इस दौरान पुलिस पर पथराव और धारदार हथियारों का प्रदर्शन भी हुआ, फिर भी कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। सोमवार रात को भी निहंगों ने पत्थरबाजी की थी, जिससे क्षेत्र में दहशत फैल गई थी। वार्ता के लिए आए शिष्टमंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि कर्णप्रयाग मामले में प्रशासन जो भी कार्रवाई करेगा, वह उन्हें मंजूर होगी और उन्होंने श्रद्धालुओं से कानून को हाथ में न लेने की अपील की। अब स्थानीय लोग जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मिलकर तहरीर सौंपने की तैयारी कर रहे हैं, जो दर्शाता है कि निहंगों के जाने के बाद भी यह विवाद समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि एक नए मोड़ पर आ गया है।


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