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क्या कम होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार समझौता हो गया है। दोनों देशों के बीच हुए शांति समझौते के बाद मिडिल-ईस्ट का सबसे अहम समुद्री रास्ता हॉर्मुज दोबारा खुल गया है। इससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की किल्लत खत्म होने जा रही है और जल्द ही मार्केट में भारी ऑयल सरप्लस देखने को मिल सकता है। सरप्लस मतलब, डिमांड से ज्यादा सप्लाई होगी। जब सप्लाई ज्यादा होती है तो तेल की कीमतें कम होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से मंगाने वाले भारत में क्या अब पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी कम होंगी? क्या महंगाई के मोर्चे पर आम आदमी को राहत मिलेगी। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अगले दो साल में दुनिया में तेल की सप्लाई मांग के मुकाबले बहुत तेजी से बढ़ेगी, जिससे 2027 तक बाजार में भारी ऑयल सरप्लस की स्थिति बन जाएगी। मिडिल-ईस्ट में तनाव की वजह से रोजाना करीब 1.4 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई रुकी हुई थी, जो अब बहाल होने जा रही है। इस स्थिति पर क्रिस्टल एनर्जी के ग्लोबल एडवाइजर क्रिस्टोफ रूहल का कहना है कि साल 2027 में वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई मांग से रोजाना 10 लाख बैरल से ज्यादा हो जाएगी। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे आ सकती हैं। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें पिछले तीन महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं हैं।

भारतीय उपभोक्ताओं को तुरंत राहत मिलेगी या नहीं, इस पर एक्सपर्ट्स की राय अलग है। इनवेस्टमेंट और कनेक्टिविटी के सीनियर फेलो अमित भंडारी का कहना है कि भारत में फ्यूल की कीमतों में तुरंत कोई कटौती नहीं होने जा रही है। तेल का यह सरप्लस भारत की मदद जरूर करेगा, लेकिन घरेलू बाजार में कीमतों में सुधार होने में कम से कम 5 से 6 महीने का समय लगेगा। उन्होंने देश की तेल पर निर्भरता को लेकर सचेत करते हुए कहा कि भारत की तेल पर निर्भरता खत्म नहीं होने वाली है क्योंकि रिन्यूएबल एनर्जी और एथेनॉल जैसे विकल्प अभी पूरी तरह से व्यावहारिक नहीं हैं। हम आगे भी तेल का आयात जारी रखेंगे। भंडारी कहते हैं कि चीन कम तेल खरीद रहा है और क्रूड की प्रोसेसिंग भी कम कर रहा है, क्योंकि वह अपने आपातकालीन तेल भंडार का इस्तेमाल कर रहा है। इसके अलावा चीन में पिछले पांच सालों से गाड़ियों की बिक्री में डबल डिजिट की गिरावट आई है, जिससे वहां तेल की खपत काफी कम हुई है। ओपेक का मानना है कि आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं। ओपेक के महासचिव हैथम अल घैस ने कहा कि ओपेक का बाजार आउटलुक वास्तविक सप्लाई और डिमांड के आंकड़ों पर आधारित है, न कि उन धारणाओं पर जो कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव पैदा करती हैं। हमारा उद्देश्य सुर्खियां बटोरने वाले अनुमान लगाना नहीं, बल्कि बाजार का संतुलित मूल्यांकन करना है।

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