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ईएमआई पर अभी राहत नहीं

नई दिल्ली  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की आगामी अगस्त मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक से पहले कर्जदारों के मन में एक ही सवाल हैदृ क्या ब्याज दरें कम होंगी? होम लोन, कार लोन या ईएमआई सस्ती होने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए फिलहाल राहत की खबर कम ही दिख रही है। एक व्यापक सर्वेक्षण के अनुसार अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा, जिससे मौजूदा ब्याज दरें बरकरार रहेंगी। सर्वेक्षण के मुताघ्बिक 21 से 27 जुलाई के बीच 72 प्रमुख अर्थशास्त्रियों से राय ली, जिनमें से 66 विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि आरबीआई अपनी अगस्त की एमपीसी मीटिंग में रेपो रेट को मौजूदा 5.25 फीसदी पर ही बनाए रखेगा।

केवल चार अर्थशास्त्रियों ने ही 0.25 फीसदी ब्याज दर बढ़ने की संभावना जताई है, जबकि बाकी विशेषज्ञों ने स्थिरता का संकेत दिया है। यह सर्वे न सिर्फ अगस्त की बैठक के लिए, बल्कि पूरे 2026 के लिए भी ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने का अनुमान लगा रहा है, जिसके बाद 2027 की शुरुआत में ही कोई हलचल देखने को मिल सकती है। भले ही जून में महंगाई बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई हो, लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरें बढ़ाने से बचेगा। इसकी मुख्य वजह वैश्विक अनिश्चितताएं हैं, जिनमें पश्चिम एशिया में तनाव, अमेरिका के टैरिफ और भू-राजनीतिक अस्थिरता जैसे कारक शामिल हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में, आरबीआई का प्राथमिक ध्यान आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने पर हो सकता है, न कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके उस पर और दबाव डालने पर।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है, और ऐसे में ब्याज दरें बढ़ाकर अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डालना आरबीआई के लिए उचित नहीं होगा। सर्वेक्षण के अनुसार 2026-27 में औसत महंगाई दर 4.8 फीसदी रहने का अनुमान है, जो आरबीआई के अपने 5.1 फीसदी के अनुमान से कम है। यही कारण है कि फिलहाल ब्याज दरों में किसी बड़े बदलाव की तत्काल आवश्यकता नहीं दिख रही है। यदि आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति में कोई बदलाव नहीं करता है, तो होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्जों की ईएमआई में फिलहाल कोई बड़ा परिवर्तन नहीं आएगा। इसका अर्थ है कि मौजूदा ब्याज दरें अगले कुछ समय तक स्थिर बनी रह सकती हैं, जिससे कर्जदारों को न तो कोई अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और न ही कोई बड़ी राहत मिलेगी।


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